प्राणवायु के आधार पर व्यंजन वर्णों का वर्गीकरण :
प्राणवायु के आधार पर व्यंजनों को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है जो निम्नवत् है–
(i) अल्पप्राण व्यंजन वर्ण
(ii) महाप्राण व्यंजन वर्ण
(i) अल्पप्राण व्यंजन वर्ण –
ऐसा वर्ण जिसका उच्चारण करने पर प्राणवायु मुख से बहुत अल्प मात्रा में बाहर निकलती हो,उसे अल्पप्राण व्यंजन वर्ण कहते हैं।
अल्पप्राण व्यंजन वर्ण के उदाहरण – क ग ङ
च ज ञ
ट ड/ड़ ण
त द न
प ब म
य र ल व।
- प्रत्येक वर्ग का अर्थात् क–वर्ग से लेकर प–वर्ग तक के किसी भी वर्ग का पहला,तीसरा और पांचवां वर्ण अल्पप्राण व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते हैं।
- अंतःस्थ वर्ण अर्थात् य, र,ल और व अल्पप्राण व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते हैं।
- अल्पप्राण व्यंजन वर्ण की कुल संख्या 20 होती है।
- नोट :– सभी स्वर (अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ) अल्पप्राण होते हैं। अतः इनके अनुसार कुल 31 वर्ण अल्पप्राण व्यंजन के अंतर्गत आते हैं।
(ii) महाप्राण व्यंजन वर्ण :–
ऐसा वर्ण जिसका उच्चारण करते समय प्राणवायु मुख से ज्यादा मात्रा में बाहर निकलती हो, उसे महाप्राण व्यंजन वर्ण कहते हैं।
महाप्राण व्यंजन वर्ण के उदाहरण– ख घ, छ झ, ठ ढ, थ ध, फ भ, श ष स ह।
- महाप्राण व्यंजन वर्ण की कुल संख्या 14 होती है।
- प्रत्येक वर्ग का अर्थात् क–वर्ग से लेकर प–वर्ग तक के किसी भी वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते हैं।
- उसमें व्यंजन वर्ण (श ष स ह) महाप्राण व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते हैं।
{नमस्कार प्रिय पाठकों मुझे उम्मीद है कि ये लेख आपको अच्छे लगे होंगे यदि अच्छे लगे हों तो इसे अन्य पाठकों के साथ अवश्य साझा ( share ) करें.} धन्यवाद...
No comments:
Post a Comment