12/07/21

हिंदी भाषा का विकास,हिंदी भाषा के बारे में निचोड़ जानकारी।

 हिंदी भाषा का विकास कैसे हुआ?|हिन्दी भाषा का जन्म/उदय कैसे हुआ?

 हिंदी भाषा का विकास/जन्म मूल भाषा अर्थात् संस्कृत से हुआ। संस्कृत से हीं क्रमबद्ध होते हुए आगे चलकर हिंदी भाषा का जन्म हुआ। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सर्वप्रथम संस्कृत भाषा का उदय हुआ, इसी संस्कृत भाषा से कई सारे भाषाओं का विकास हुआ, इसलिए संस्कृत को मूल भाषा भी कहा जाता है।


हिंदी भाषा का विकास –

  प्रारंभ में संस्कृत के दो रूप थे, जो इस प्रकार हैं –

   (i) वैदिक संस्कृत

   (ii) लौकिक संस्कृत

 वैदिक संस्कृत और लौकिक संस्कृत में अंतर –

  (i) वैदिक संस्कृत :–

      • वैदिक संस्कृत एक साहित्यिक भाषा थी।

      • वैदिक संस्कृत में वेद , उपनिषद् लिखे गए।

  (ii) लौकिक संस्कृत :–

      • लौकिक संस्कृत लोगों के द्वारा बोली जाने वाली भाषा थी।

      • लौकिक संस्कृत भाषा में महाभारत, रामायण, रामचरितमानस जैसे ग्रंथ लिखे गये।


साहित्यिक भाषा अर्थात् वैदिक संस्कृत कठिन भाषा होने के कारण इसका विकास–क्रम धीरे–धीरे बाधित हो गया। लौकिक संस्कृत सरल भाषा होने के कारण ये जनताओं द्वारा स्पष्ट बोले चले जाते थे, जिस कारण इस भाषा का विकास–क्रम जारी रहा।

    विकास के क्रम में लौकिक संस्कृत का परिवर्तन जारी रहा, जो इस प्रकार से है–

 पालि भाषा > प्राकृत भाषा > अपभ्रंश भाषा

              लौकिक भाषा के बाद पालि भाषा का विकास हुआ तत्पश्चात् पालि के बाद प्राकृत भाषा का विकास हुआ, इसके बाद अपभ्रंश भाषा का विकास हुआ जो प्राकृत भाषा का बिगड़ा हुआ रूप था। इसी अपभ्रंश भाषा का एक प्रकार शौरसेनी अपभ्रंश भाषा है, जिस शौरसेनी अपभ्रंश भाषा से हिंदी भाषा का जन्म अर्थात् विकास हुआ।

              इस प्रकार यदि एक क्रमानुसार देखा जाय तो हिंदी भाषा के विकास का क्रम निम्नवत् है –

History of Hindi language in hindi image


  •  पालि भाषा महात्मा बुद्ध के समय में आया। इसी पालि भाषा में महात्मा बुद्ध ने त्रिपिटक नामक ग्रंथ लिखा।
  • प्राकृत भाषा जैन के समय में विकसित हुआ। इसी प्राकृत भाषा में जैन धर्म की पवित्र ग्रंथ आगम सूत्र या आगम साहित्य लिखा गया ।

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