संरचना के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण :
संरचना के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण 5 प्रकार से किया गया है, जो निम्नवत् है–
(i) संयुक्त क्रिया
(ii) पूर्वकालिक क्रिया
(iii) प्रेरणार्थक क्रिया
(iv) नामधातु क्रिया
(v) कृदंत क्रिया
(i) संयुक्त क्रिया :–
जिस वाक्य के अंतर्गत एक वाक्य को बताने के लिए एक से अधिक क्रियापद संयुक्त रुप से सम्मिलित हों, उस क्रिया को संयुक्त क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण – मैंने पानी पी लिया। {पी लिया=पिया}
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "मैंने पानी पी लिया" में दो क्रियापद – "पी" (पीना) और "लिया" (लेना) संयुक्त रूप से प्रयुक्त है। उदाहरण में प्रयुक्त वाक्य को बिना अर्थ में परिवर्तन किए अन्य तरीके से भी लिखा जा सकता है, इस प्रकार से– "मैंने पानी पिया"।
"मैंने पानी पिया" इसी वाक्य में दो क्रिया पद के द्वारा परिवर्तन कर "मैंने पानी पी लिया" वाक्य बनाया गया है। इस वाक्य में "पी लिया" को संयुक्त रूप से सम्मिलित कर "पिया" शब्द प्रयुक्त किए गए हैं। अतः दो क्रिया पद के प्रयुक्त होने के कारण इसे संयुक्त क्रिया के अंतर्गत लिखे गये हैं।
संयुक्त क्रिया के अन्य उदाहरण–
उसने आम खा लिया ।
श्याम ने किताब पढ़ लिया।
बच्चे को खेलना दौड़ना भी चाहिए।
मोहन तैरना जानता है।
किताब बोलकर पढ़ना अच्छी बात है। आदि।
- उपर्युक्त वाक्य के अंतर्गत सारे रेखांकित शब्द संयुक्त क्रिया के उदाहरण हैं।
(ii) पूर्वकालिक क्रिया :–
दो क्रियापद वाले वाक्य में यदि एक क्रियापद पहले आरंभ होती हो और पहले हीं पूर्ण हो जाती हों तत्पश्चात् दूसरी क्रिया पद आरंभ होती हों और पूर्ण हो जाती हों या चलती रहती हों तो उस वाक्य में पहले पूर्ण हो चुकी क्रिया को पूर्णकालिक क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण– करीना बैठकर खाने लगी।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "करीना बैठकर खाने लगी" में शब्द "बैठकर" पूर्वकालिक क्रिया है। क्योंकि प्रस्तुत वाक्य में दो क्रियापद ( बैठना और खाना ) प्रयुक्त हुए हैं और प्रथम क्रियापद "बैठकर" पहले आरंभ होकर पहले हीं पूर्ण हो जाती है।
पूर्णकालिक क्रिया के अन्य उदाहरण –
मनीष पानी में कूदकर तैरने लगा।
मधुमाला खड़ी होकर भोजन पकाने लगी।
चूहा शेर के शरीर पर चढ़कर फूदकने लगा।
अच्छी सेहत के लिये खाकर दौड़ना नहीं चाहिए।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में सारे रेखांकित शब्द पूर्वकालिक क्रिया के अंतर्गत आते हैं।
(iii) प्रेरणार्थक क्रिया :–
जिस वाक्य के अंतर्गत वाक्य का कर्त्ता स्वयं कोई कार्य न करके किसी अन्य से करवाते हों, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण– शिक्षक विद्यार्थी से पाठ का अभ्यास करवाते हैं।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "शिक्षक विद्यार्थी से पाठ का अभ्यास करवाते हैं" में वाक्य का कर्त्ता "शिक्षक" किसी अन्य व्यक्ति "विद्यार्थी" से "पाठ का अभ्यास" करवाने का कार्य कर रहे हैं। अतः इस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया "अभ्यास करवाना" प्रेरणार्थक क्रिया है।
प्रेरणार्थक क्रिया के अन्य उदाहरण–
राजा जनक पहलवानों से धनुष उठवाते हैं।
सैनिक नवयुवकों को दौड़वाते हैं।
गुरु शिष्य से गुरुकुल साफ करवाते हैं। आदि।
- उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण हैं।
(iv) नामधातु क्रिया :–
यदि संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण के साथ कोई प्रत्यय जोड़ने पर बनने वाला नया शब्द क्रिया का रूप धारण कर ले तो वह नवनिर्मित क्रिया, नामधातु क्रिया कहलाती है।
उदाहरण–
बाँध – बाँधना , बाँधवाना
रंग – रंगना , रंगाना
चिकना – चिकनाना
बात – बतियाना
लज्जा – लजियाना , लजाना
शर्म – शर्माना
ठंडा – ठंडाना
चक्कर – चकराना
हाथ – हथियाना
लाठी – लठियाना
फटकार – फटकारना
लात – लतियाना
थरथर – थरथराना
गरम – गरमाना
अपना – अपनाना
मोटा – मोटाना आदि।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ शब्द "लाठी" संज्ञा है। इसमें "याना" प्रत्यय जोड़ने पर एक नया शब्द "लठियाना" बन जाता है, जो कि नामधातु क्रिया है।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ में सारे रेखांकित शब्द नामधातु क्रिया है।
(v) कृदंत क्रिया :–
धातु में "ना" प्रत्यय के अतिरिक्त किसी अन्य प्रत्यय को जोड़ने पर बनने वाला नया शब्द यदि क्रिया हो तो वह क्रिया कृदंत क्रिया कहलाती है।
उदाहरण – खा+या = खाया
पी+कर = पीकर
दौड़+ता = दौड़ता
तैर+एगा = तैरेगा
सो+कर = सोकर
सो+ई = सोयी आदि।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ में रेखांकित शब्द कृदंत क्रिया के अंतर्गत आते हैं।
{नमस्कार प्रिय पाठकों मुझे उम्मीद है कि ये लेख आपको अच्छे लगे होंगे यदि अच्छे लगे हों तो इसे अन्य पाठकों के साथ अवश्य साझा ( share ) करें.} धन्यवाद...
No comments:
Post a Comment