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कक्षा 6 NCERT भूगोल अध्याय–4 ‘पृथ्वी के प्रमुख स्थल’ संपूर्ण नोट्स हिंदी में

 4. पृथ्वी के प्रमुख रूप

हमारी पृथ्वी के 71% भूभाग पर जल का विस्तार है जबकि 29% भूभाग पर स्थल है। यथार्थ में पृथ्वी पर लगभग एक–चौथाई हिस्सा हीं स्थलमंडल है। पृथ्वी पर संपूर्ण स्थल के विभिन्न रूप एवं आकृतियां हैं। स्थल का विभिन्न रूप एवं आकृति होने के कारण इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस नोट्स में इन्हीं स्थल रूप एवं विभिन्न स्थलाकृतियां के बारे में विश्लेषण किया गया है। कृपया आप बने रहें।

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Neeraj Manish Ganesh
Sameli Katihar Bihar
Chakla Purnia Uttar Pradesh
Kursela Bhagalpur Jharkhand


पृथ्वी पर स्थल के तीन स्थलाकृतियाँ हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जो निम्नवत है–
(1.) मैदान
(2.) पठार
(3.) पर्वत
मैदान,पठार और पर्वत/पहाड़

(1.) मैदान :–
पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जिसकी सतह समतल होती है एवं वह नीची भूमि (lowland) का क्षेत्र होता है, उसे मैदान कहते हैं।
            मैदान की प्रमुख विशेषता है कि यह अपने आस–पास के पठार तथा पर्वत से ऊंचे कभी नहीं हो सकते जबकि यह समुद्र से ऊंचे या नीचे हो सकते हैं।
  • मैदान का निर्माण प्रायः एक ही प्रकार की मिट्टी से हुआ है, जिसमें थोड़ा बहुत स्थानीय अंतर हो सकता है।
  • मैदानी क्षेत्र में ही कृषि कार्य जैसे–अनाजों का उत्पादन होता है।
  • मैदानी क्षेत्र की भूमि समतल है अर्थात यह न अधिक ऊंची है और न हीं अधिक नीची है।
  • मैदानी क्षेत्र में थोड़ा अलग–अलग प्रकार की मिट्टी है, जैसे– चिकनी मिट्टी, दोमट मिट्टी, दलदली मिट्टी आदि।
  • मैदानी क्षेत्र का चिकनी मिट्टी धान की फसल के लिए प्रमुख मिट्टी मानी जाती है, क्योंकि इस मिट्टी में धान की फसल खूब उपजती है। चिकनी मिट्टी को केवाल मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है।
  • दलदली मिट्टी में दलहन की फसल खूब उपजती है जिस कारण इस मिट्टी को दलदली मिट्टी के नाम से जाना जाता है।
  • मैदानी क्षेत्र में धान, गेहूं, मक्का, चना, ईख, मूंग, तंबाकू इत्यादि जैसे अन्य फसल भी उपजते हैं। साथ हीं विभिन्न तरह के सब्जी की खेती, फल की खेती इत्यादि भी होती है।
  • मैदानी क्षेत्र में जीवन–यापन के लिए भोजन, जल, आवास एवं परिवहन की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होते हैं।
  • स्थलमंडल के मैदानी क्षेत्र में ही सड़क मार्ग, रेल मार्ग का निर्माण किया जाता है।
  • बिहार में मैदानी क्षेत्र अधिकतर गंगा नदी के दोनों तरफ फैला हुआ है। साथ ही ऐसे मैदान पश्चिम में पंजाब से लेकर पूरब में असम तक मिलते हैं जो सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र के दोनों तरफ फैले हुए हैं। इसलिए इस प्रकार के मैदानी इलाके को सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र का मैदान भी कहते हैं। गंगा/सतलज/ब्रह्मपुत्र के दोनों तरफ के ये मैदानी क्षेत्र अनाज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • मैदान तीन प्रकार के होते हैं– अपरदन मूलक मैदान, निक्षेपण मूलक मैदान, रचनात्मक मैदान।
मैदानी क्षेत्र/भाग कक्षा6 भूगोल
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मैदान के प्रकार :–
मैदान मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नवत है–
(१.) अपरदन मूलक मैदान
(२.) निक्षेपण मूलक मैदान
(३.) रचनात्मक मैदान

(१.) अपरदन मूलक मैदान –
अपरदन की क्रिया के फलस्वरूप जिस मैदान का निर्माण होता है उसे अपरदन मूलक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– फिनलैंड का मैदान, उत्तर–यूरोप के पूर्वी क्षेत्र का मैदान, कनाडा के पूर्वी क्षेत्र का मैदान।

(२.) निक्षेपण मूलक मैदान –
निक्षेपण की क्रिया के फलस्वरूप नदियों, हिमानी, वायु तथा सागरीय तरंगों से जिस मैदान का निर्माण होता है उसे निक्षेपन मूलक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– हंगरी का मैदान, केरल के तट के मैदान।

(३.) रचनात्मक मैदान –
पृथ्वी की आंतरिक हलचलों के कारण जिस मैदान का निर्माण होता है उसे रचनात्मक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– उत्तरी अमेरिका का मध्यवर्ती मैदान।

(2.) पठार :–

पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जो मैदान से ऊंची होती है एवं जिसका सतह सपाट होता है उसे पठार कहते हैं।
उदाहरण– छोटा नागपुर का पठार, तिब्बत का पठार, दक्कन का पठार, पामीर का पठार आदि।
  • पठार कुछ सौ किलोमीटर से कई हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक के होते हैं।
  • हमारे देश के दक्कन का पठार एवं छोटा नागपुर का पठार हजारों किलोमीटर की ऊंचाई तक फैले हैं।
  • संसार का सबसे ऊंचा पठार ‘तिब्बत का पठार’ है जिसकी ऊंचाई लगभग 45 किलोमीटर की है।
  • पामीर के पठार को ‘संसार की छत’ कहा जाता है।

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(3.) पर्वत :–

पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जो पठार से ऊंची होती है एवं जिसका सतह निकटवर्ती क्षेत्रों से बहुत संकीर्ण होता है उसे पर्वत कहते हैं।
              पर्वत की यह संकीर्णता लंबी श्रृंखला के रूप में भी फैले होते हैं जिस श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहा जाता है।
   
            कुछ पर्वत बहुत ऊंचे होने के कारण यहां बर्फ जमी रहती है और इनसे कई नदियां निकलती है जैसे– भारत में हिमालय पर्वत पर बर्फ जमी रहती है एवं इनसे कई नदियां भी निकलती है। पर्वत से निकलने वाली नदियों के जल का उपयोग सिंचाई तथा पनबिजली उत्पादन में किया जाता है। पर्वत पर्यावरण संरक्षण एवं वर्षा कराने में भी सहायक होते हैं मैदानी क्षेत्र की अपेक्षाकृत पर्वत पर खेती करना बहुत कठिन होता है, खेती करने के लिए पर्वत पर सीढ़ीदार खेत बनाने पड़ते हैं। अरावली पर्वत की ऊंचाई कम होने के कारण इसके शीर्ष भाग पर बर्फ नहीं जमती है तब पर भी अरावली पर्वत से नदियां निकलती है क्योंकि वहां पर यह नदियां वर्षा जल के कारण निकलती है। पर्वत भिन्न-भिन्न आकार के होते हैं, कम ऊंचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहते हैं। बिहार के राजगीर की पहाड़ी, मंदार हिल की पहाड़ी, बराबर की पहाड़ी, गिरियक की पहाड़ी, हवेलीखड़गपुर की पहाड़ी आदि इनके उदाहरण है।
पर्वत के शीर्ष पर बर्फ जमे होने के कारण लोग यहां स्कीईंग करते हैं यह पर्यटक के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। शिमला और कश्मीर में पर्यटक इस का खूब आनंद लेते हैं।
               पर्वत पर घने जंगल, अत्यधिक ऊंचाई एवं परिवहन का अभाव होने के कारण यहां जीवन जीना मैदानों की अपेक्षाकृत कठिन है। पर्वत पर घने जंगल होने के कारण यह वर्षा कराने में भी अधिक सहायक होते हैं जिससे पर्यावरण का संरक्षण होता है। यहां कई प्रकार की जड़ी–बूटी, वनस्पतियां औषधियां, चारा, जीव–जंतु आदि पाए जाते हैं।
  • पर्वत मैदान और पठार दोनों से ऊंचा होता है।
  • कम ऊंचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहा जाता है।
  • पृथ्वी पर जल वर्षा का मुख्य कारण पर्वत पर के घने जंगल हैं।
  • पर्वत पर खेती करने के लिए सीढ़ीदार खेत बनाने पड़ते हैं।
  • पर्वत तीन प्रकार के होते हैं– वलित पर्वत, भ्रंशोत्थ पर्वत और ज्वालामुखी पर्वत।
सीढ़ीदार खेत
बर्फ पर स्कीइंग करना


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पर्वत के प्रकार :–

पर्वत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नवत है–
(१.) वलित पर्वत
(२.) भ्रंशोत्थ पर्वत
(३.) ज्वालामुखी पर्वत
हिमालय पर स्थित माउंट एवरेस्ट



(१.) वलित पर्वत –

ऐसा पर्वत जिसका सतह उबड़–खाबर हो एवं शिखर अर्थात सबसे ऊंची चोटी का आकार शंक्वाकार हो उसे वलित पर्वत कहते हैं।
उदाहरण– हिमालय पर्वत (भारत), एंडीज पर्वत (दक्षिण अमेरिका).

(२.) भ्रंशोत्थ पर्वत –

ऐसा पर्वत जो पृथ्वी के आंतरिक हलचलों के कारण पड़ने वाली दरारों के बीच वाले भाग से उत्पन्न होते हैं, उसे भ्रंशोत्थ पर्वत कहा जाता है।
उदाहरण– भारत का सतपुड़ा पहाड़.

(३.) ज्वालामुखी पर्वत –

ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली लावा एवं अन्य पदार्थों का ठंडा होकर जम जाने से जिस पर्वत का निर्माण होता है उसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं।
उदाहरण– विसुवियत पर्वत (इटली).

सक्रिय ज्वालामुखी पर्वतऐसा ज्वालामुखी पर्वत जिसमें हमेशा विस्फोट होता रहता है, उसे सक्रिय ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं।

उदाहरण– भारत के अंडमान निकोबार के बैरन आईलैंड में पाए जाने वाले पर्वत, सक्रिय ज्वालामुखी पर्वत के उदाहरण हैं।


मैदान, पठार और पर्वत का बदलता स्वरूप :–
मैदान, पठार और पर्वत के जिस गुण अथवा विशेषता के कारण इसे मैदान, पठार एवं पर्वत के रूप में वर्गीकृत किया गया है अब वे सब विशेषता धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं। अब मैदान, पठार और पर्वत पहले जैसे नहीं रह गए इसका मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या है। अब लोग पहाड़ों पर बसने लगे भोजन, आवास, वस्त्र की पूर्ति के लिए, सड़क निर्माण की पूर्ति के लिए पठारों और पहाड़ों को काटा जा रहा है। यहां के वनों को काटा जा रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती जा रही है। मानव जीवन के बहुत आवश्यकता की पूर्ति पठारों, पहाड़ों से होने लगी है फलतः इसे काटा जा रहा है। इसका खूब दोहन होता जा रहा है, जिससे अब पहाड़, पठार विलुप्त होते जा रहे हैं। इन सब की प्राकृतिक सुंदरता भी घटती जा रही है। अतः मैदान, पठार और पर्वत अपनी विशेषता को खो रहे हैं और इनके स्वरूप में रूपांतरण होते चले जा रहे हैं। मैदानी क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए, कल–कारखानों के लिए, आवासीय कार्यों के लिए, अन्य जैसी दैनिक दिनचर्याओं के लिए, भू–जल का भारी उपभोग हो रहा है। जल का इस तरह उपयोग होने से अनुमान है कि आने वाली पीढ़ी को भारी जल समस्या का सामना करना पड़ेगा।

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