सौरमंडल :–
ब्रह्मांड में सूर्य सहित सूर्य के चारों तरफ घूमने वाले सारे खगोलीय पिंड जैसे– "ग्रह,नक्षत्र,उपग्रह,उल्का पिंड, क्षुद्र ग्रह", तारामंडल,आकाशगंगा आदि के सम्मिलित रूप को सौरमंडल कहते हैं। सौरमंडल का मुखिया सूर्य होता है।
सौर प्रज्ज्वाल –
सूर्य की सतह पर धधकती हुई आग की लपटें दिखाई देती है। सूर्य की सतह पर यह धधक उठती रहती है इस आग की धधक के अनुपात में बहुत तेज चमक भी उत्पन्न होती है, जिसे सौर प्रज्ज्वाल कहते हैं।
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ग्रह :–
सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंड को ग्रह कहते हैं।
- ग्रह में स्वयं का प्रकाश नहीं होता बल्कि यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है।
- सौरमंडल में ग्रहों की कुल संख्या आठ है, जो इस प्रकार से है– बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।
- सभी ग्रहों का मुखिया सूर्य होता है। यथार्थ में सौरमंडल का मुखिया सूर्य होता है।
- ग्रह की दो गति होती है– एक अपने अक्ष पर की गति एवं दूसरी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने की गति।
- ग्रह का अपने अक्ष पर की गति को परिभ्रमण गति कहते हैं।
- ग्रह का सूर्य के चारों तरफ की गति को परिक्रमण गति कहते हैं।
(१.) बुध ग्रह –
- सूर्य के सबसे निकट का ग्रह– बुध ग्रह है।
- आकार में सभी ग्रहों से छोटा– बुध ग्रह है।
- बुध ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 58.6 दिन में पूरा करता है।
- सूर्य के चारों तरफ परिक्रमा को पूर्ण करने में बुध ग्रह को 87.97 दिन का समय लगता है।
- बुध ग्रह का एक भी उपग्रह नहीं है।
(२.) शुक्र ग्रह–
- सूर्य के दूसरा सबसे निकट का ग्रह शुक्र ग्रह है।
- आकार के आधार पर छठा सबसे बड़ा ग्रह शुक्र ग्रह है।
- शुक्र ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 243 दिन में पूरा करता है एवं परिक्रमण गति को 224.7 दिन में पूरा करता है।
- शुक्र ग्रह का एक भी उपग्रह नहीं है।
- सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह शुक्र ग्रह है।
- सर्वाधिक चमकीला ग्रह शुक्र ग्रह है।
- शुक्र को चमकीला ग्रह, सांझ का तारा या भोर का तारा भी कहा जाता है।
- पृथ्वी के सबसे निकट का ग्रह शुक्र ग्रह है।
(३.) पृथ्वी ग्रह –
- सूर्य के सबसे निकट का तीसरा ग्रह– पृथ्वी ग्रह है।
- आकार के आधार पर पांचवा सबसे बड़ा ग्रह पृथ्वी ग्रह है।
- पृथ्वी एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है।
- पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा है।
- पृथ्वी को नीला ग्रह भी कहते हैं क्योंकि जल की उपस्थिति के कारण यह नीले रंग का प्रतीत होता है।
- पृथ्वी ग्रह अपने अक्ष पर 23.5° झुका हुआ है
- पृथ्वी ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 24 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य के परितः की गति को 365 दिन में पूरा करता है।
- इस ग्रह पर जल, हवा, आवश्यक गैसें प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं।
प्रश्न: पृथ्वी ग्रह को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के 71% भूभाग पर जल एवं 29% भूभाग पर स्थल है। जलीय भूभाग का सर्वाधिक उपस्थिति के कारण प्रकाश का परावर्तन भी अधिक होता है। चूंकि पानी के सतह से नीले रंग का परावर्तन सर्वाधिक होता है। अतः अंतरिक्ष से पृथ्वी ग्रह को देखने पर यह ग्रह नीले रंग का प्रतीत होता है।
(४.) मंगल ग्रह –
- सूर्य के सबसे निकट का चौथा ग्रह– मंगल ग्रह है।
- आकार के आधार पर सातवां सबसे बड़ा ग्रह मंगल ग्रह है
- मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहते हैं क्योंकि इस ग्रह पर आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति होती है, जिसका रंग लाल भूरा होता है।
- मंगल ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 24.6 घंटा में पूरा करता है एवं परिक्रमण गति को 687 दिन में पूरा करता है।
- इस ग्रह के 2 उपग्रह हैं– फोबोस और डाइमोस।
(५.) बृहस्पति ग्रह –
- सूर्य के सबसे निकट का पांचवा ग्रह– बृहस्पति ग्रह है।
- आकार के आधार पर सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति ग्रह है।
- इस ग्रह को अपने अक्ष पर पूर्णतः घूमने में सबसे कम समय लगता है जो कि लगभग 10 घंटा है।
- इस ग्रह को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगभग 12 वर्ष लगता है।
- इस ग्रह के 79 उपग्रह हैं। बृहस्पति ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह– ग्यानीमीड उपग्रह है।
- इस ग्रह का रंग पीला होता है।
(६.) शनि ग्रह–
- सूर्य के सबसे निकट का छठा ग्रह– शनि ग्रह है।
- आकार के आधार पर सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह शनि ग्रह है।
- शनि ग्रह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 10 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य का परिक्रमा 29.46 वर्ष में करता है।
- सर्वाधिक उपग्रह वाला ग्रह शनि है जिसे कुल 82 उपग्रह हैं।
- शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है।
- शनि ग्रह एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसके चारों ओर छल्ला अर्थात् वलय हैं।
(७.) अरूण (यूरेनस) –
- सूर्य के सबसे निकट का सातवां ग्रह– अरुण ग्रह है.
- आकार के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा ग्रह अरुण ग्रह है.
- यह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 16 घंटा में पूरा करता है और सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरा करता है.
- इस ग्रह के 27 उपग्रह हैं जिनमें सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया उपग्रह है.
- इसे लेटा हुआ ग्रह भी कहते हैं।
(८.) वरूण (नेप्च्यून) –
- सूर्य के सबसे दूर का ग्रह वरुण– ग्रह है.
- आकार के आधार पर चौथा सबसे बड़ा ग्रह वरुण ग्रह है.
- यह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 18 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य की परिक्रमा 165 वर्ष में पूरा करता है.
- सूर्य का एक परिक्रमा करने में सबसे ज्यादा समय वरुण ग्रह को हीं लगता है।
- इस के उपग्रहों की संख्या 13 है।
क्षुद्रग्रह :–
- क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच रहकर सूर्य का परिक्रमा करता है.
- खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहों के टूटे हुए छोटे-छोटे टुकड़े को ही क्षुद्रग्रह कहते हैं। वास्तव में क्षुद्रग्रह ग्रह का ही टूटा हुआ भाग होता है.
- सबसे बड़ा शुद्र ग्रह सिरस है।
- क्षुद्रग्रह मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच में रहता है।
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उपग्रह :–
ग्रह के चारों ओर घूमने वाले आकाशीय पिंड को उपग्रह कहते हैं।
- उपग्रह का अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता बल्कि यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है.
- सभी उपग्रह ग्रह का परिक्रमा करता है.
- सबसे ज्यादा उपग्रह वाला ग्रह शनि ग्रह है.
- सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह ग्यानीमीड उपग्रह है।
- पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा है।
पृथ्वी का उपग्रह : चंद्रमा –
- चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है यह पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है।
- चंद्रमा का प्रकाश पृथ्वी पर लगभग 1.25 सेकंड में पहुंचता है।
- चंद्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और इतने ही समय में चंद्रमा अपने अक्ष पर भी एक चक्कर लगा लेता है, इसी कारण चंद्रमा का सदैव एक हीं सतह दिखाई देता है.
- चंद्रमा पर दिन में बहुत गर्मी एवं रात में बहुत ठंडी होती है।
- चंद्रमा का सतह ऊबड़–खाबर है और इस पर मिट्टी भी नहीं है।
- चंद्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहते हैं।
- चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है। जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है–
उल्कापिंड –
सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंडों के भाग टूट कर उसके टुकड़े गिरने लगते हैं जिसे उल्का पिंड कहा जाता है।
यह टुकड़े गिरने के क्रम में वायु के साथ घर्षण के कारण गर्म होकर जल जाते हैं जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह टुकड़े पूर्णतः नहीं चल पाते हैं और बिना पूरी तरह जले ही पृथ्वी पर गिर जाते हैं, जिस कारण पृथ्वी की सतह पर गड्ढा बन जाता है।
आकाशगंगा–
आकाश में दूर-दूर तक रास्ते की तरह असंख्य तारों की चौड़ी गुच्छे फैली हुई होती है जो सफेद चमकदार पट्टी की तरह दिखती है जिसे आकाशगंगा कहते हैं।
- आकाशगंगा को तारों की नदी भी कहते हैं
- आकाशगंगा को प्रकाश की एक बहती हुई नदी भी कहते हैं।
सप्तर्षि तारा–
यह सात ताराओं का एक समूह है, जिस कारण इसे सप्तर्षि तारा कहते हैं। यह रात्रि आकाश में उत्तर दिशा की तरफ नजर आता है। भारतीय विद्वानों ने इन सातों ताराओं का नामकरण ऋषियों के नाम पर किया है, जो इस प्रकार है– ऋतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, वशिष्ठ, अंगिरा एवं मरिची।
यूनानी ग्रंथों में इन सातों ताराओं का नामकरण इस प्रकार से किया गया है– अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, एपिसिलोन, एटा एवं जेटा।
ध्रुवतारा–
यह एक स्थिर तारा है जो उत्तरी गोलार्द्ध में पृथ्वी के उत्तरी अक्ष पर अवस्थित है। ध्रुव तारा सदैव उत्तर दिशा में दिखता है। इसी तारा के दिशा का बोध कर प्राचीन काल के नाविक समुद्र में नाव के द्वारा यातायात करते थे। विषुवत रेखा पर किसी भी स्थान से देखने पर ध्रुवतारा क्षितिज पर दिखाई पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे ध्रुव की ओर बढ़ते हैं उसी अनुपात में क्षितिज से ध्रुवतारा की ऊंचाई भी बढ़ने लगती है। क्षितिज से ध्रुवतारे की ऊंचाई जितनी डिग्री होती है, उस स्थान का अक्षांश भी उतना डिग्री हीं होता है।
राशि–
सौरमंडल में तारों के कई विशेष समूह हैं जिसकी कुल संख्या बारह है, जिसे राशि कही जाती है।
इन विशेष तारों के समूह में कई तारे कुछ विशेष आकृति के नजर आते हैं, इन्हीं आकृति के आधार पर बारह राशियों का नामकरण किया गया है, जो इस प्रकार से है–
मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ तथा मीन।
नक्षत्र–
पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न तारों का समूह अथवा समुदाय है जिसकी संख्या 27 है, जिसे नक्षत्र कहते हैं।
प्रत्येक नक्षत्र को पृथ्वी 14 दिन में पार करती है, इसलिए नक्षत्र की अवधि भी 14 दिन को होती है। 27 नक्षत्र का नाम इस प्रकार से है–
अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हथिया, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठ, मूल, पूर्वा आषाढ़, उत्तरा आषाढ़, श्रावण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती।
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................................धन्यवाद..................................
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