हिन्दी वर्णमाला में कुछ ऐसे वर्ण हैं जिनमें बिंदु (dot)(•) का प्रयोग द्वारा वह वर्ण अपना मूल रूप धारण करता है। इस लेख में इसी बिंदु के बारे में विश्लेषण किया गया है। वर्ण के साथ प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के बिंदु (dot)(•) को क्या कहते हैं? इन बिंदु का प्रयोग वर्णों के साथ किन–किन स्थानों पर किया जाता है? इस बिन्दु का क्या महत्व है? चलिए प्रस्तुत मुद्दे पर विश्लेषण करते हैं।
(i) नुक्ता चिह्न –
किसी वर्ण की खड़ीपाई के बाईं तरफ लिखी गई बिंदु को नुक्ता चिह्न कहते हैं।
नुक्ता चिह्न के उदाहरण – क़, ख़, ग़, ज़, फ़।
- नुक्ता चिह्न केवल 5 वर्णों पर लगते हैं, वे 5 वर्ण इस प्रकार से है– क, ख, ग, ज और फ।
- नुक्ता चिह्न अरबी/फारसी भाषा के हैं।
- जिन हिन्दी वर्णों पर नुक्ता चिह्न का प्रयोग होता है, वे हिन्दी वर्ण अरबी/फारसी भाषा के बन जाते हैं।
- उपर्युक्त पाँच वर्ण– "क ख ग ज फ" में, इस वर्ण के खड़ीपाई से पहले अर्थात् वर्ण के बाईं तरफ एक बिंदी (dot) लगाई गई है, यथार्थ में उसी बिंदी (dot) का नाम नुक्ता चिह्न हैं।
- "जमाना" शब्द का अर्थ होता है– ठंडा करना। (–4°c) ताप पर पानी जमकर बर्फ बन जाता है अर्थात् ठंडा हो जाता है, इस "जमाना" का यही अर्थ है।
- "ज़माना" शब्द का अर्थ होता है– देश या दुनिया। कभी–कभी बोलचाल की भाषा में "युग–ज़माना खराब हो गया" ऐसे भी वाक्य का प्रयोग करते हैं।
- उपर्युक्त दो उदाहरण "जमाना", "ज़माना" से ज्ञात होता है कि नुक्ता चिह्न के प्रयोग से किसी शब्द का अर्थ बदल जाता है।
- नुक्ता चिह्न वाले शब्द–ज़रूरत, ऐतराज़, ज़मानत, दफ़्तर, सज़ा, राज़, सफ़ेद, क़िताब, ज़मानत, फ़ोन, तूफ़ान, ज़मींदार, उफ़, ताज़े,ज़ोरदार आदि।
(ii) अनुस्वार (ं) –
किसी भी वर्ण के ऊपर अर्थात् शिरोरेखा के ऊपर लिखी गई बिंदु को अनुस्वार कहते हैं।
अनुस्वार के उदाहरण – (ं) ।
- अनुस्वार का उच्चारण स्थान नाक होता है अर्थात् अनुस्वार की ध्वनि नाक से होकर बाहर निकलती है।
- हाथ की अंगुली से नाक को बंद करके अनुस्वार युक्त शब्द सही–सही उच्चारित नहीं होते। जैसे– "नंदनी" में अनुस्वार का प्रयोग किया गया है, नाक बंद करके "नंदनी" शब्द को उच्चारित करने पर यह अच्छी तरह उच्चारित नहीं होते।
- अनुस्वार के प्रयोग से बने शब्द– पंकज, चंदन, नंदन, कंचन, दंगल, जंगल, मंगल, रंजन आदि।
- शब्द "पंकज" में प वर्ण के ऊपर एक बिंदी लगाई गई है, उसी बिंदी का नाम अनुस्वार है।
(iii) पंचमाक्षर बिंदु –
किसी भी वर्ण के दायीं तरफ लगाई गई बिंदु को पंचमाक्षर बिंदु कहते हैं।
पंचमाक्षर बिंदु के उदाहरण– ङ
- उपर्युक्त उदारहरणार्थ के अंतर्गत क–वर्ग के पांचवां वर्ण के साथ पंचमाक्षर बिंदु का प्रयोग किया गया है।
- "ङ" में जो दाईं तरफ एक बिंदी लगाई गयी है यथार्थ में इसी बिंदी अथवा बिंदु का नाम पंचमाक्षर बिन्दु है।
- पंचमाक्षर बिंदु केवल एक हीं वर्ण के साथ लगते हैं, वो वर्ण है– क–वर्ग का 5वाँ वर्ण।
(iv) ताड़नजात चिह्न –
किसी भी वर्ण के नीचे लगाई गई या लिखी गई बिंदु को ताड़नजात चिह्न कहते हैं।
ताड़नजात चिह्न के उदाहरण – ड़ और ढ़।
- उपर्युक्त उदाहरणार्थ ड़ और ढ़ वर्ण के नीचे एक बिंदी लगाई गई है, यथार्थ में इसी बिंदी अथवा बिंदु का नाम ताड़नजात चिह्न है।
- ताड़नजात चिह्न का प्रयोग ट–वर्ग के वर्णों के साथ किया जाता है।
- ताड़नजात चिह्न का प्रयोग केवल दो वर्णों के साथ हीं होता है, वो वर्ण है– ड़ और ढ़।
- ताड़नजात चिह्न को उत्क्षिप्त बिंदु भी कहे जाते हैं।
{नमस्कार प्रिय पाठकों मुझे उम्मीद है कि ये लेख आपको अच्छे लगे होंगे यदि अच्छे लगे हों तो इसे अन्य पाठकों के साथ अवश्य साझा ( share ) करें.} धन्यवाद...
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