2/28/22

Bihar board class 6 science solution chapter 7 ‘पेड़ पौधे की दुनिया’

 1. निम्न के चित्र बनाएँ :

(क) मूसला जड़    (ख) रेशेदार जड़    (ग) पत्ती

उत्तर : (क) मूसला जड़ का चित्र निम्नवत है–
Bihar board class 6 science solution chapter 7 ‘पेड़ पौधे की दुनिया’, मूसला जड़ ,musla jar, musala jad


(ख) रेशेदार जड़ का चित्र निम्नवत है–
Bihar board class 6 science solution chapter 7 ‘पेड़ पौधे की दुनिया’,रेशेदार/ झकड़ा जड़,reshedar jad,jhakda jad


(ग) पत्ती का चित्र निम्नवत है–
Bihar board class 6 science solution chapter 7 ‘पेड़ पौधे की दुनिया’,पत्ती का चित्र,

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2. यदि किसी पौधे की पत्ती में समानांतर शिरा–विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होंगी?
उत्तर : रेशेदार जड़।

3. यदि किसी पौधे की जड़ झकड़ा हो तो उसकी पत्ती का शिरा–विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर : जालिका शिरा–विन्यास.

4. निम्न में से जालिका रूपी शिरा–विन्यास एवं समानांतर शिरा–विन्यास वाली पत्तियों का अलग–अलग समूह बनाएं।
धान, गेहूं, मक्का, पीपल, आम, धनिया, तुलसी
उत्तर: जालिका रूपी शिरा–विन्यास वाली पत्तियां–
पीपल, आम, धनिया, तुलसी.
समानांतर शिरा–विन्यास वाली पत्तियां–
धान, गेहूं, मक्का.

5. पौधे में जड़ का क्या कार्य है?
उत्तर: पौधे में जड़ का कार्य निम्न है–
  • जल मिट्टी को मजबूती से पकड़ कर रखता है जिससे पेड़ पौधे को खड़े रहने में सहायता मिलती है तथा मिट्टी को कटने (कटाव) से बचाती है।
  • जड़ मिट्टी में मौजूद जल एवं खनिज लवणों को अवशोषित करती है।
  • कुछ पौधों की जड़ें भोजन को संग्रहित कर भी रखते हैं।
6. तना के दो कार्य बताएँ?
उत्तर : तना के दो कार्य निम्नवत हैं–
  1. तना पौधों को आकृति प्रदान करता है।
  2. तना जल, खनिज लवण एवं भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुंचाने का एक मार्ग है।
7. जड़ के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर : जड़ दो प्रकार के होते हैं, जो निम्नवत है–
(i) मूसला जड़ एवं
(ii) रेशेदार जड़ / झकड़ा जड़.

8. जड़ के दो मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर: जड़ के दो मुख्य कार्य निम्नवत हैं–
  1. जड़ मिट्टी को मजबूती से पकड़ कर रखता है जिससे पौधों को खड़ा रहने में सहायता मिलती है।
  2. यह मिट्टी में मौजूद जल एवं खनिज लवणों को अवशोषित करती है।
9. पत्तियों के दो मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर: पत्तियों के दो मुख्य कार्य निम्नवत है–
  1. पत्ती प्रकाश–संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करती है।
  2. पत्ती वाष्पोत्सर्जन की क्रिया करती है, जिसमें जल की बूंदें पत्ती से जलवाष्प के रूप में निकलती है।
10. यदि किसी पौधे की जड़ रेशेदार हो तो उसकी पत्ती का शिरा–विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर: पौधे की जड़ रेशेदार होने पर उस पौधे की पत्ती में जालिका शिरा–विन्यास होगी।

11. यदि किसी पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा–विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होंगी?
उत्तर: मूसला जड़।

12. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

क.  जड़ें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं: मूसला जड़ एवं ............ जड़।
ख.  जड़ें मिट्टी से जल एवं ......... का अवशोषण करती हैं।
ग.   पौधों को तीन वर्गों में बांटा जा सकता है–शाक, झाड़ी एवं ....…..।
घ.  झकड़ा जड़ का दूसरा नाम ............. जड़ है।
ङ.  जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समानांतर होती हैं, उसे ............... शिरा–विन्यास कहते हैं।
उत्तर :–
क. रेशेदार जड़ / झकड़ा जड़.
ख. खनिज लवण
ग. वृक्ष
घ. रेशेदार जड़
ङ. समानांतर.

13. सही विकल्प चुनिए:
क. आम है–
1.शाक,     2.झाड़ी,     3.वृक्ष,     4.कोई नहीं।

ख. पत्तियां जल का उपयोग बनाने के लिए करती हैं–
1.भोजन   2.वाष्पोत्सर्जन    3.ऑक्सीजन    4.सभी में

ग. जल की बूंदें पत्तियों से जलवाष्प के रूप में निकलती हैं। इस क्रिया को कहते हैं–
1.वाष्पोत्सर्जन           2.प्रकाश–संश्लेषण
3.ऑक्सीकरण          4.इनमें से कोई नहीं।

घ. मक्के के बीज में एक ही बीजपत्र होता है। अतः इसे ............... कहते हैं।
उत्तर :–
क. – (3.) वृक्ष
ख. – (4.) सभी में
ग. – (1.) वाष्पोत्सर्जन
घ. – एकल–बीजपत्री.

परियोजना कार्य :
क. सूखी पत्तियों की एक प्रदर्शनी तैयार करें।
उत्तर:–

ख. मूसला जड़ एवं झकड़ा जड़ की एक प्रदर्शनी तैयार करें।
उत्तर:– मूसला जड़–


झकड़ा जड़–

2/24/22

बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है

अध्याय 2. भोजन में क्या–क्या आता है?

भोजन के विभिन्न रूप हैं अर्थात् भोजन के अंतर्गत हम विभिन्न प्रकार के खाद्य–पदार्थ का उपभोग करते हैं। जैसे–भात, दाल, सब्जी, खिचड़ी, सत्तू, सलाद, फल, साग, हरी सब्जी इत्यादि भोजन के रूप में लेते हैं। भोजन के रूप में जितने भी खाद्य–पदार्थ का उपभोग करते हैं, उन भिन्न–भिन्न खाद्य–पदार्थों में भिन्न–भिन्न तरह के पोषक–तत्त्वों की मौजूदगी होती है। भिन्न–भिन्न तरह के पोषक–तत्त्वों की पूर्ति जब शरीर में होती है तो उसी के अनुरूप शरीर में ताकत एवं स्फूर्ति मिलती है। विभिन्न तरह के खाद्य–पदार्थों में किस–किस पोषक–तत्त्वों की मौजूदगी होती है? अथवा भोजन के अंतर्गत क्या सब आते हैं? इन्हीं सब विषयों पर विशद विश्लेषण इस ब्लॉग पोस्ट में किया गया है, कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें।

पोषक–तत्त्व (Nutrient)–

भोजन के अंतर्गत आने वाले समग्र खाद्य पदार्थ जिनसे शरीर का पोषण होता है अर्थात शरीर की वृद्धि, विकास एवं स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होते हैं उन सभी खाद्य पदार्थ अथवा भोजन के अवयव को पोषक तत्व कहा जाता है।
      हमारे भोजन के मुख्य पोषक तत्व के अंतर्गत कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण आते हैं इनके अलावा रेशा (रूक्षांश) तथा जल मौजूद होते हैं जो हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
        खाद्य पदार्थ के अंतर्गत कच्ची खाद्य सामग्री या पके हुए भोजन का उपयोग किया जाता है। इन खाद्य पदार्थ में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व उपस्थित होते हैं, जैसे– कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति मंड (starch) के रूप में होती है। खाद्य पदार्थ में पोषक तत्वों की उपस्थिति की जांच विभिन्न परीक्षण के द्वारा किया जाता है। खाद्य पदार्थ में उपस्थित विभिन्न तरह के पोषक तत्वों की जांच नीचे की गई है।


पोषक तत्व की जांच हेतु उपयुक्त सामग्री–

टिंक्चर आयोडीन, कॉपर सल्फेट, कास्टिक सोडा, परखनली, ड्रॉपर, जल, खाद्य–पदार्थ एवं विभिन्न प्रकार के घोल (विलयन) जिसे तैयार करने की विधि नीचे दर्शायी गई है।

घोल तैयार करने की विधि–
पोषक तत्व की परीक्षण हेतु आयोडीन का तनु घोल, कॉपर सल्फेट का घोल एवं कास्टिक सोडा का घोल की आवश्यकता होगी।

(i) आयोडीन का तनु घोल तैयार करना–
जल से आधी भरी हुई परखनली में ड्रॉपर की सहायता से 8–10 बूंद टिंक्चर आयोडीन मिलाने पर आयोडीन का तनु घोल बन जाता है।
(ii) कॉपर सल्फेट का घोल तैयार करना–
100 ml जल में 2 ग्राम कॉपर सल्फेट को घोलने पर कॉपर सल्फेट का घोल तैयार हो जाता है।
(iii) कास्टिक सोडा का घोल तैयार करना–
कास्टिक सोडा का घोल तैयार करने के लिए 10 ग्राम कास्टिक सोडा को 100ml जल में घोलें।

मंड की जांच :
मंड की जांच करने के लिए थोड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ/कच्ची सामग्री पर आयोडीन के तनु घोल को एक–दो बूंद डालें। खाद्य पदार्थ पर आयोडीन के तनु घोल के एक–दो बूंद को डालने पर यदि खाद्य पदार्थ के रंग में परिवर्तन होकर उसका रंग नीला या काला हो जाए तो खाद्य पदार्थ में परिवर्तन यह नीला या काला रंग मंड की उपस्थिति को दर्शाता है।

प्रोटीन की जाँच :
जिस खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति का जांच करना हो उस खाद्य पदार्थ को पीसकर या मसलकर उसका चूर्ण बना लें। खाद्य पदार्थ के इस चूर्ण को एक साफ परखनली में अल्प मात्रा में डाल दें। तत्पश्चात उस परखनली में ड्रॉपर की सहायता से 10 बूंद जल, 2 बूंद कॉपर सल्फेट का घोल एवं 10 बूंद कास्टिक सोडा का घोल डाल दें। परखनली को अच्छी तरह हिला कर कुछ मिनट के लिए रख दें ताकि परखनली के अंदर घोल एवं खाद्य पदार्थ अच्छी तरह मिलकर स्थिर हो जाए। कुछ देर के बाद परखनली में रखे खाद्य पदार्थ का रंग बैंगनी रंग का हो जाएगा। खाद्य पदार्थ का यह बैगनी रंग खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति को दर्शाता है।

वसा की जांच :
खाद्य पदार्थ की अल्प मात्रा को लीजिए और इसे एक छोटे कागज में लपेट कर कुटिये। ध्यान रखें कि कूटने के क्रम में कागज फटने न पाए। थोड़ी देर कूटने के बाद आराम से कागज को खोल कर सीधा करें और उस पर उपस्थित खाद्य पदार्थ को अलग कर दें। अब कागज को ध्यान पूर्वक देखें, उस कागज पर तेल का छोटा-छोटा धब्बा दिखाई देगा। कागज पर तेल का यह धब्बा खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति को दर्शाता है। यदि धब्बा दिखाई नहीं दे तो उस खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति नहीं होगी।

शरीर के लिए पोषक तत्व की जरूरत–
हमारे शरीर के लिए विभिन्न पोषक तत्व, जैसे– विटामिन, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट आदि की जरूरत होती है। इन सभी जरूरतों की पूर्ति खाद्य पदार्थ से होती है। भिन्न भिन्न तरह के खाद्य पदार्थ में भिन्न-भिन्न तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ऐसे बहुत सारे खाद्य पदार्थ हैं जिसमें दो या दो से अधिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। विभिन्न पोषक तत्वों का हमारे शरीर में क्या–क्या कार्य है चलिए जानते हैं–

कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) –
हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट का मुख्य कार्य शरीर में उर्जा प्रदान करना है। शरीर में ताकत कार्बोहाइड्रेट के कारण ही मिलती है। कार्बोहाइड्रेट का मुख्य स्रोत– चावल, गेहूं, मक्का, गन्ना, बाजरा, आलू, शकरकंद, आम, पपीता आदि है। सबसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट चावल में मौजूद होते हैं।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत

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वसा (fats)–
वसा भी हमारे शरीर में ऊर्जा प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेट की अपेक्षाकृत शरीर में अधिक ऊर्जा वसा के द्वारा प्राप्त होती है। अतः वसा और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन को ‘ऊर्जा देने वाला भोजन’ भी कहे जाते हैं। वसा के स्रोत– सूरजमुखी तेल, नारियल तेल, सरसों तेल, सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल, गिरि, घी आदि हैं अर्थात इन सभी खाद्य पदार्थों में वसा प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है,वसा के मुख्य स्रोत



प्रोटीन (protein)–
हमारे शरीर की वृद्धि के लिए प्रोटीन बहुत आवश्यक पोषक तत्व है। साथ ही प्रोटीन शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। प्रोटीन के मुख्य स्रोत– पनीर, दूध, मटर, मूंग, तुअर, चना, सोयाबीन, राजमा, मांस, मछली, अंडा इत्यादि हैं।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है,प्रोटीन के पादप स्रोत,प्रोटीन के मुख्य स्रोत

बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, प्रोटीन के जंतु स्रोत, प्रोटीन के मुख्य स्रोत



विटामिन (vitamin)–
हमारे शरीर के रोगों से रक्षा करने के लिए विटामिन सहायक होते हैं। विटामिन हमारे आंखों, हड्डियों, दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं।
                   विटामिन विभिन्न प्रकार के होते हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे– विटामिन ए,  विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन बी, और विटामिन के। विटामिन का एक खास समूह है, जिन्हें ‘विटामिन बी कॉम्प्लेक्स’ के नाम से जाना जाता है। हमारे शरीर में इन सभी विटामिंस की जरूरत होती है।

विटामिन–ए –
विटामिन–ए हमारे शरीर की त्वचा और आंख को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। विटामिन–ए की कमी से रतौंधी नामक रोग होता है। विटामिन–ए के मुख्य स्रोत हैं– गाजर, दूध, पपीता, आम, मछली तेल आदि।
  • रतौंधी नामक रोग में दूसरे व्यक्ति की अपेक्षाकृत रोगी को कम दिखाई पड़ता है या अंधेरे में बिल्कुल भी दिखाई नहीं पड़ता।
  • बच्चों में यदि विटामिन–ए की बहुत कमी हो जाए तो वह बच्चा हमेशा के लिए अंधा हो सकता है।
  • प्रायः पीले रंग के गूदेदार फल में विटामिन–ए पाया जाता है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, विटामिन–ए के स्रोत



विटामिन–बी –
विटामिन–बी हमारे शरीर की पेशियों को मजबूत बनाता है एवं शरीर में ऊर्जा की पूर्ति करता है। शरीर में विटामिन–बी की कमी होने से ‘बेरी–बेरी’ नामक रोग उत्पन्न हो जाता है। विटामिन–बी का मुख्य स्रोत– गेहूं, चावल, यकृत आदि है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है,विटामिन बी के मुख्य स्रोत



विटामिन–सी –
विटामिन–सी हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है अर्थात रोगों से लड़ने में हमारी मदद करता है। विटामिन–सी की कमी से ‘स्कर्वी’ नामक रोग उत्पन्न हो जाता है। विटामिन–सी का मुख्य स्रोत– आंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, अमरूद, मिर्ची आदि है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है,विटामिन सी के मुख्य स्रोत



विटामिन–डी –
हमारे शरीर में हड्डियों (अस्थियों) और दांतो को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम सहायक होते हैं। विटामिन–डी कैल्शियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता है। विटामिन–डी की कमी से ‘रिकेट्स’ नामक रोग हो जाता है।  विटामिन–डी का मुख्य स्रोत– दूध, मक्खन, अंडा, कलेजा, मछली आदि है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है,विटामिन डी के मुख्य स्रोत

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खनिज लवण (mineral salts)–
हमारे शरीर में खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती है। खनिज लवण विभिन्न प्रकार के होते हैं। हमारे शरीर का उचित विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक प्रकार के खनिज लवण आवश्यक हैं।

खनिज लवण के प्रकार–
खनिज लवण मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं– सोडियम, कैलशियम, पोटैशियम, मैग्निशियम और फास्फोरस। इनके अतिरिक्त लोहा, आयोडीन, मैग्नीज, तांबा, जस्ता, क्रोमियम ये सब भी खनिज लवण के ही प्रकार हैं। हमारे शरीर को लौह तत्व की प्राप्ति हरी सब्जियां विशेषकर पालक, मेथी तथा केला से होती हैं। उसी तरह फास्फोरस और कैल्शियम की प्राप्ति मछली, अंडा इत्यादि से होती है। कैल्शियम का मुख्य स्रोत दूध है। शरीर में सोडियम और पोटेशियम की पूर्ति नमक से होती है।

रूक्षांश (आहारी रेशा)–
रूक्षांश हमारे शरीर के लिए किसी भी प्रकार का पोषक तत्व नहीं है। फिर भी यह शरीर के लिए बहुत उपयोगी अवयव है। रूक्षांश बिना पचे हुए भोजन को हमारे शरीर से बाहर निकालने में सहायक होते हैं। रूक्षांश को ‘आहारी रेशा’ भी कहा जाता है। हमारे भोजन में आहारी रेशे की पूर्ति मुख्यतः पादप उत्पादों जैसे– अंकुरित खाद्यान्न, दाल, आलू, ताजे फल और सब्जियां आदि से होती है। अनाज के चोकर से भी रूक्षांश की प्राप्ति होती है।

जल (water) –
हमारे शरीर के द्वारा भोजन में मौजूद पोषक तत्व का अवशोषण होता है। जल इन पोषक तत्वों को अवशोषण करने में हमारी मदद करता है। आवश्यकता से कम मात्रा में जल लेने पर शरीर द्वारा पोषक तत्वों का अधिग्रहण ठीक ढंग से नहीं हो पाता है। जल हमारे अंदर के विकारों को, अपशिष्ट पदार्थों को पसीने व मूत्र के साथ बाहर निकालता है। शरीर में जल की पूर्ति के लिए हम सामान्यतः भौमजल (जैसे–ट्यूबवेल, नलकूप, कुआं आदि) का सदैव अधिग्रहण करते हैं। इनके अलावा द्रव रूप में जितने भी खाद्य पदार्थ हैं उसमें मौजूद जल से भी हमारे शरीर में जल की पूर्ति होती है। जैसे– चाय, कॉफी, दूध फल का रस आदि।
                 ताजे फल या सब्जी में मौजूद जल से भी हमारे शरीर में जल की पूर्ति होती है। कुछ खाद्य पदार्थों को जल के साथ पकाते हैं या पकाते समय उसमें जल चला जाता है। इस खाद्य पदार्थों को ग्रहण करने से भी हमारे शरीर में जल की पूर्ति होती है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, विटामिन के कारण उत्पन्न रोग और उनके लक्षण


संतुलित आहार (balance food)–
सामान्यतः पूरे दिन में हम जो कुछ भी खाते हैं, उसे आहार कहा जाता है।
           ऐसा आहार (भोजन) जिसमें पोषक तत्व की मौजूदगी न हीं अधिक मात्रा में और न हीं कम मात्रा में होनी चाहिए अर्थात उचित मात्रा में होने चाहिए, साथ ही रूक्षांश और जल भी पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए, ऐसे आहार को संतुलित आहार कहे जाते हैं।
         हमारे शरीर में संतुलित आहार शारीरिक कार्य अथवा मानसिक कार्य पर निर्भर करता है। ज्यादा श्रम करने वाले व्यक्ति को श्रम नहीं करने वाले व्यक्ति की अपेक्षाकृत ज्यादा मात्रा में संतुलित आहार लेने की आवश्यकता होती है। ज्यादा मानसिक कार्य करने वाले व्यक्ति को भी ज्यादा मात्रा में संतुलित आहार की जरूरत होती है। कोई व्यक्ति कम खर्च में भी संतुलित आहार ले सकता है।
जैसे– दाल, मूंगफली, सोयाबीन, अंकुरित बीज, खमीर उठा भोजन, आटे के बने व्यंजन, केला, पालक, सत्तू, गुड़ आदि में उचित मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह सभी खाद्य पदार्थ संतुलित आहार के अंतर्गत आते हैं।
                  कच्ची खाद्य सामग्री को आवश्यकता से अधिक पका देने पर उसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जैसे– पकाने पर ज्यादा गर्मी के कारण भोजन में मौजूद विटामिन–सी नष्ट हो जाते हैं। अतः कच्ची खाद्य सामग्री को उचित तरीके से पकाना चाहिए। सब्जियों और फलों के छिलकों में महत्वपूर्ण विटामिंस एवं खनिज लवण मौजूद होते हैं। छिलका उतारकर यदि सब्जियों और फलों को धोया जाता है तो उसमें मौजूद विटामिन कुछ मात्रा में नष्ट हो जाते हैं  चावल और दाल को बार-बार धोने से उसमें मौजूद विटामिंस और खनिज लवण कुछ मात्रा में नष्ट हो जाते हैं।

कुपोषण (malnutrition)–
जब शरीर को संतुलित भोजन नहीं मिल पाता अर्थात शरीर को आवश्यक मात्रा में पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती तो इस स्थिति को कुपोषण कहा जाता है।
             संतुलित भोजन नहीं मिलने पर अर्थात कुपोषण की स्थिति होने पर शरीर में मरासमस (सूखा रोग) नामक रोग उत्पन्न हो जाता है। यह रोग अधिकतर बच्चों में दिखाई देते हैं। बच्चे को संतुलित भोजन नहीं मिलने पर या कम भोजन मिलने पर प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम मिलती है, जिससे बच्चा काफी कमजोर व दुबला–पतला हो जाता है। छाती में पसली की हड्डियां भी दिखाई देने लगती है।
       यदि किसी बच्चे को भोजन में अन्य सभी पोषक तत्व मिले लेकिन प्रोटीन कम मिले अथवा नहीं के बराबर मिले तो उस बच्चे में क्वाशियोरकर नामक रोग उत्पन्न हो जाता है।
  • क्वाशियोरकर नामक रोग में रोगी का पेट फुला हुआ दिखाई देता है, साथ ही हाथ–पैर भी फूला हुआ दिखाई देने लगता है।
  • बच्चा काफी कमजोर और दुबला–पतला हो जाता है एवं छाती में पसली की हड्डी भी दिखाई देने लगती है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, सुखा रोग के लक्षण, मरासमस रोग के लक्षण उपचार

बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, क्वाशियोरकर रोग के लक्षण उपचार


अतिपोषण (overnutrition)–
ज्यादा मात्रा में वसा युक्त खाद्य पदार्थ ग्रहण करने पर शरीर में मोटापा बढ़ने लगता है, इस स्थिति को अतिपोषण कहा जाता है
            अधिक मात्रा में तली हुई खाद्य सामग्री, समोसा, पूरी–मलाई, रबड़ी, पेड़ा आदि खाने पर शरीर अतिपोषण का शिकार हो जाता है अर्थात् मोटापा बढ़ने लगती है।
बिहार बोर्ड कक्षा6 विज्ञान सटीक नोट्स chapter 2 भोजन में क्या–क्या आता है, अतिपोषन रोग के लक्षण और उपचार



अभावजन्य रोग (deficiency disease)–
यदि लंबे समय तक पोषक तत्व युक्त खाद्य पदार्थ को ग्रहण नहीं किया जाए तो इस पोषक तत्व के अभाव के कारण शरीर में एक रोग उत्पन्न हो जाता है, जिसे अभावजन्य रोग कहते हैं।
  • यदि भोजन में लगातार पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिले तो उस भोजन को ग्रहण करने वाले व्यक्ति में इस प्रकार के अभावजन्य रोग हो जाएंगे– वृद्धि में रुकावट हो जा, चेहरे पर सूजन, बालों के रंग का उड़ना, त्वचा की बीमारी, पेचिश आदि।
  • यदि किसी व्यक्ति के भोजन में लगातार प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट नहीं मिले तो उस व्यक्ति की वृद्धि पूरी तरह रुक जाएगी। ऐसा व्यक्ति बिल्कुल दुबला पतला हो जाएगा। इतना कमजोर हो जाएगा कि वह चलने में भी असमर्थ होगा।
  • यदि किसी व्यक्ति को भोजन के अंतर्गत लंबे समय तक विटामिन और खनिज लवण नहीं मिले तो वह विभिन्न अभाव जन्य रोगों से ग्रसित हो जाएगा।
  • अभाव जन्य रोगों से बचने के लिए अथवा इसके रोकथाम के लिए संतुलित आहार लेने चाहिए।

दूषित भोजन (contiminated food)–
हानिकारक सूक्ष्मजीव युक्त खाद्य पदार्थ को दूषित भोजन कहा जाता है।
        मक्खियां विभिन्न जगहों पर बैठती है एवं वहां से हानिकारक सूक्ष्मजीवों को अपने साथ लाकर जिस खाद्य पदार्थ पर बैठती है वह खाद्य पदार्थ दूषित हो जाता है। भोजन को सदैव ढंक कर रखना चाहिए अन्यथा वह हानिकारक सूक्ष्म जीव से संस्पर्श होने पर दूषित हो सकता है। दूषित खाद्य पदार्थ में खटास हो जाती है एवं वह दुर्गंध युक्त हो जाता है। ऐसा खमीर (किण्वन) उठने के कारण होता है। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिसमें खमीर (किण्वन) लाभदायक होते हैं, जैसे– जलेबी, भटूरा, मालपुआ, इडली, डोसा, पावरोटी आदि।
         गर्मी के दिनों में पका हुआ भोजन जल्दी खराब हो जाता है, क्योंकि गर्मी के कारण किण्वन तीव्र होता चला जाता है। दूषित जल पीने पर अतिसार जैसी बीमारी उत्पन्न होने लगती है। दूषित जल से भोजन पकाने पर भोजन भी दूषित हो जाता है। दूषित भोजन बहुत सारी बीमारियों का मूल जड़ है। अतः दूषित खाद्य पदार्थ से बचना चाहिए।

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2/20/22

Bihar board solution class 6 science chapter 5 ‘पृथक्करण’

 1. सही उत्तर चुनिए–

(क) वे पदार्थ जो पानी या अन्य तरल पदार्थों में घुल जाते हैं उन्हें कहा जाता है–
(i) घुलनशील           (ii) अघुलनशील
(iii) थिराना             (iv) निथारना

(ख) पदार्थों को अलग–अलग करने की क्रिया कहलाती है–
(i) वाष्पीकरण       (ii) चुनना
(iii) छानना          (iv) इनमें से सभी

(ग) जल में अघुलनशील एवं जल से भारी कण बर्तन के पेंदे में जम जाने की क्रिया कहलाती है–
(i) पृथक्करण         (ii) निथारना
(iii) थिराना           (iv) इनमें से कोई नहीं

(घ) थिराने के बाद जमे हुए पदार्थ से जल या अन्य द्रव को अलग करने की क्रिया कहलाती है–
(i) निथारना         (ii) थिराना
(iii) थ्रेसिंग         (iv) छानना

(ङ) जब मिश्रण बहुत कम मात्रा में हो तो इसे अलग करने की कौन–सी विधि बेहतर होगी।
(i) चुनना                (ii) चालना
(iii) निथारना         (iv) क्रोमैटोग्राफी
उत्तर:–
(क)– (i) घुलनशील,
(ख)– (iv) इनमें से सभी,
(ग)– (iii) थिराना,
(घ)– (i) निथारना,
(ङ)– (iv) क्रोमेटोग्राफी.

2. रिक्त स्थानों को भरें :
(क) गेहूं के दानों को भूसियों से अलग करने की विधि ............ कहलाती है।

(ख) समुद्र के जल से नमक ............ विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है।

(ग) चाय की पत्तियों को चाय से अलग करने की क्रिया ........... कहलाती है।

(घ) क्रोमेटोग्राफी का उपयोग पेड़–पौधे में पाई जाने वाली दवाइयों को .......… करने में किया जाता है।
उत्तर :– (क) ओसाना, (ख) थिराना, (ग) छानना, (घ) अलग.

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3. मिश्रण से अवयवों को अलग करने की जरूरत क्यों होती है?
उत्तर: मिश्रण में उपयोगी पदार्थ के साथ–साथ अशुद्धि के रूप में बहुत सारे अनुपयोगी पदार्थ भी मिश्रित होते हैं, जिस कारण मिश्रणयुक्त अवयव की गुणवत्ता घट जाती है। इस प्रकार मिश्रण में मौजूद मुख्य अवयव का सही–सही उपयोग नहीं हो पाता। मिश्रण से अवयवों को अलग कर लेने पर अशुद्धि स्वतः अलग हो जाती है और केवल शुद्ध पदार्थ अर्थात् उपयोगी पदार्थ बचा रहता है। इस प्रकार इस शुद्ध अवयवों का इस्तेमाल किया जाता है। अतः मिश्रण से अवयवों को अलग करने की जरूरत होती है।

4. बालू और चीनी के मिश्रण को कैसे अलग किया जा सकता है? लिखिए।
उत्तर: बालू और चीनी के मिश्रण में बालू  अघुलनशील पदार्थ है जबकि चीनी घुलनशील पदार्थ है। मिश्रण से बालू और चीनी को पृथक करने के लिए मिश्रण में पानी डाल देंगे। पानी डालने पर घुलनशील पदार्थ अर्थात चीनी घुल जाएगा जबकि अघुलनशील पदार्थ अर्थात बालू नहीं घुल पाएगा। अब अघुलनशील पदार्थ से घुलनशील पदार्थ को छान कर अलग कर लिया जाता है। तत्पश्चात वाष्पन की क्रिया द्वारा उस घोल से चीनी को अलग कर लिया जाता है। अतः इन संपूर्ण प्रक्रिया द्वारा बालू और चीनी के मिश्रण को अलग किया जा सकता है।

5. पृथक्करण की किन्हीं तीन विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पृथक्करण के किन्हीं तीन विधियों का वर्णन निम्नवत है–
(i) ओसाई– पृथक्करण के इस विधि का उपयोग अधिकतर अनाज भंडारण हेतु किया जाता है। इस विधि में मिश्रित पदार्थ को 7–8 फुट की ऊंचाई से गिराया जाता है। गिराने के क्रम में भारी पदार्थ (अनाज) नीचे गिर जाता है जबकि हल्का पदार्थ (भूसा) हवा के माध्यम से उड़ जाता है। इस प्रकार उपयोगी पदार्थ का भंडारण कर लिया जाता है।

(ii) चुनना– पृथक्करण के इस विधि में जिस पदार्थ की मात्रा कम होती है (मिश्रण में मौजूद वह पदार्थ चाहे उपयोगी पदार्थ हो या चाहे अशुद्धि हो), उस पदार्थ को चुनकर बाहर निकाल लिया जाता है।
जैसे– चावल से कंकड़ को अलग करना।

(iii) छानना– पृथक्करण के इस विधि में अशुद्धि को छांककर अलग किया जाता है। इस विधि का उपयोग केवल द्रव के साथ मिश्रित पदार्थ को अलग करने में किया जाता है।
जैसे– चाय से चायपत्ती अलग करना, उबले हुए चावल से गर्म पानी (मांड) अलग करना, गर्म तेल से पकौड़ी छांकना, चीनी रस से मिठाई छाँकना आदि।

विचार करें :

1. जल में मिले अशुद्धियों को कैसे दूर करेंगे?
उत्तर: जल में मिले अशुद्धियों को छानकर या वाष्पीकरण की क्रिया द्वारा अलग किया जा सकता है। छानने की प्रक्रिया में एक सरंध्र पात्र होता है, इस सरंध्र पात्र पर अघुलनशील पदार्थ (अशुद्धि) से मिश्रित पानी को डाला जाता है। पानी शुद्ध होकर सरंध्र पात्र के नीचे छंक जाता है जबकि अघुलनशील पदार्थ के रूप में अशुद्धि सरंध्र पात्र में फंसा रह जाता है। इस प्रकार जल से अशुद्धि अलग हो जाती है।

वाष्पीकरण – वाष्पीकरण की प्रक्रिया में जल में मिले अशुद्धियां घुलनशील पदार्थ के रूप में हो या अघुलनशील पदार्थ के रूप में हो, सब अलग हो जाती है। वाष्पीकरण की क्रिया में अशुद्धि मिले पानी को उबाला जाता है। उबलने के क्रम में पानी वाष्प बनकर उड़ने लगता है जबकि अशुद्धियां वाष्प नहीं बन पाती। पानी से जो वाष्प बनता है, पुनः उस वाष्प को पानी में परिणत कर दिया जाता है और अशुद्धि उस पात्र में हीं रह जाती है जिस पात्र में उबाला गया था। अतः इस संपूर्ण प्रक्रिया द्वारा जल में मिले अशुद्धियों को अलग कर दिया जाता है।

2. दूध किन–किन पदार्थों का मिश्रण है?
उत्तर: दूध में पोषक–तत्त्व के रूप में बहुत सारे पदार्थ मिश्रित होते हैं। दूध कैल्शियम, फास्फोरस मैग्नीशियम, आयोडिन, प्रोटीन, विटामिन–ए, विटामिन–डी, विटामिन–इ, विटामिन–के, विटामिन–बी2, वसा, खनिज–लवण, जल इत्यादि का मिश्रण है। पोषक–तत्वों के रूप में इन सारे–के–सारे पदार्थों की मौजूदगी दूध में मिश्रित रूप में होते हैं।



2/16/22

Bihar board class 6 science solution chapter 4 “विभिन्न प्रकार के पदार्थ”

 अभ्यास

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए–
(1) जल में चीनी .......... है।
(2) .......... पदार्थ से होकर प्रकाश अंशतः पार करता है।
(3) कुछ गैसें जल में ............. है।
(4) कुछ पदार्थ ठंडे पानी में .......... और गरम पानी में .......... घुलते हैं।
उत्तर: (1) घुलनशील, (2) पारभाशी, (3) घुलनशील, (4) कम ; ज्यादा

2. स्तंभ ‘अ’ का स्तंभ ‘ब’ से सही मिलान कीजिए –
        स्तंभ ‘अ’                      स्तंभ ‘ब’
(i)   विलेय                   (क) नमक, चीनी
(ii) अविलेय                 (ख) प्रायः धातु होते हैं
(iii) घोलक/विलायक     (ग) ऑक्सीजन
(iv) चमकवाले पदार्थ     (घ) लोहा, रेत आदि
(v)   जल में विलीन गैस  (ङ) जल
उत्तर :–
(i) –––––––––> (क)
(ii) ––––––––> (घ)
(iii) ––––––––> (ङ)
(iv) ––––––––> (ख)
(v) –––––––––> (ग)

3. निम्न वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(i) वह पदार्थ जो आसानी से दबाये या  खरोंचे जा सकते हैं, ............ पदार्थ है।
(कोमल / कठोर)
(ii) हमारे हाथ में तैलीय पेंट या अलकतरा लग जाता है, तो इसे हम ............ से साफ करते हैं।
(जल / केरोसीन तेल)
(iii) वे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुओं को देखा जा सकता है, ............. कहलाते हैं।
(पारदर्शी / अपारदर्शी)
(iv) वे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुओं को नहीं देखा जा सकता है, ............... कहलाते हैं।
(अपारदर्शी / पारदर्शी)
(v) पानी पर तैरनेवाली वस्तुएं ........... तथा पानी में डूब जानेवाली वस्तुएं ........... होती हैं।
(भारी / हल्की)
उत्तर:–
(i) कोमल,    (ii) केरोसीन तेल,   
(iii) पारदर्शी,
(iv) अपारदर्शी,   (v) हल्की ; भारी

4. सही विकल्प चुनिए–
(i) निम्न में कोमल पदार्थ हैं–
(क) साबुन   (ख) रबड़   (ग) लकड़ी   (घ) लोहा

(ii) निम्न पदार्थ में चमक होती हैं–
(क) लोहा   (ख) तांबा   (ग) सोना   (घ) लकड़ी

(iii) निम्न में कौन-कौन से पदार्थ जल के अलावा भी घोलक हो सकता है–
(क) तेल                (ख) तारपीन का तेल
(ग) केरोसीन तेल     (घ) सरसों का तेल

(iv) वह घोल जिसमें घुल्य पदार्थ की और मात्रा घुलने की क्षमता नहीं होती, कहलाता है–
(क) संतृप्त घोल       (ख) असंतृप्त घोल
(ग) हल्का घोल         (घ) गाढ़ा घोल

(v) वैसे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुएं या चीजें अस्पष्ट रूप से या धुंधली दिखाई देती हैं, कहलाते हैं–
(क) पारदर्शी            (ख) अपारदर्शी
(ग) पारभासी            (घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:–
(i)– (ख) रबड़
(ii)– (ग) सोना (वास्तव में लोहा और तांबा भी चमकदार पदार्थ है लेकिन विकल्प में सबसे ज्यादा चमकदार पदार्थ सोना है.)  
(iii)– (ग) केरोसीन तेल,  
(iv)– (क) संतृप्त घोल,
(v)– (ग) पारभाषी.

5. प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर :– प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं के नाम निम्नवत हैं–
बाल्टी, कुर्सी, प्लास्टिक का थैला, खिलौना, बोतल, डिब्बा, वाटर स्टोरेज टैंक, चम्मच, कलम, टब, ड्रॉम, गिलास, थाली, कटोरा, रस्सी, बोड़ी, टेबुल इत्यादि।

6. जल में तैरनेवाली तथा डूबनेवाली वस्तुओं का समूह बनाएं।
उत्तर :–जल में तैरनेवाली तथा डूबने वाली वस्तुओं का समूह निम्न तालिका के अंतर्गत दर्शाया गया है–
जल में तैरनेवाली तथा डूबनेवाली वस्तुओं का समूह बनाएं,Bihar board class 6 science solution chapter 4 “विभिन्न प्रकार के पदार्थ”

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7. पारभासी, पारदर्शी एवं अपारदर्शी वस्तु में अंतर बताएं।
उत्तर :– पारभाषी, पारदर्शी एवं अपारदर्शी वस्तु में निम्नलिखित अंतर है–
पारभासी, पारदर्शी एवं अपारदर्शी वस्तु में अंतर बताएं,Bihar board class 6 science solution chapter 4 “विभिन्न प्रकार के पदार्थ”



8. विलेय एवं अविलेय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:–
विलेय–
ऐसे पदार्थ जो जल में पूर्णतः घूलकर जल में हीं विलीन हो जाते हैं, उसे विलेय पदार्थ/घुलनशील पदार्थ कहे जाते हैं। इस प्रकार से जो पदार्थ जल में घुल जाते हैं, उस पदार्थ को जल में विलेय (घुलनशील) समझा जाता है।
अविलेय–
ऐसे पदार्थ जो जल में नहीं घुल पाते, उसे अविलेय पदार्थ/अघुलनशील पदार्थ कहा जाता है। इस प्रकार से जो पदार्थ जल में नहीं घुल पाते, उस पदार्थ को जल में अविलेय (अघुलनशील) समझा जाता है।

9. संतृप्त घोल किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:– पानी (घोलक) की निश्चित मात्रा में किसी पदार्थ की अधिकतम मात्रा घुलने पर जो घोल बनता है, उसे संतृप्त घोल कहते हैं।
उदाहरण– चीनी का घुलना।

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