अभ्यास
1. निम्नलिखित तंतुओं को प्राकृतिक तथा मानव निर्मित में वर्गीकृत कीजिए।
नायलॉन, ऊन, रूई, रेशम, पॉलिस्टर, पटसन।
उत्तर: प्राकृतिक तंतु – ऊन, रूई, रेशम, पटसन
मानव–निर्मित तंतु– नायलॉन, पॉलिस्टर।
2. नीचे दिए गए कथन ‘सत्य’ है अथवा ‘असत्य’ उल्लेख कीजिए:
(क) तंतुओं से धागा बनता है। (सत्य)
(ख) कताई वस्त्र निर्माण की एक प्रक्रिया है। (सत्य)
(ग) जूट नारियल का बाहरी आवरण होता है। (असत्य)
(घ) रूई से बिनौले (बीज) हटाने की प्रक्रिया को ओटना कहते हैं। (सत्य)
(ङ) धागों की बुनाई से वस्त्र का एक टुकड़ा बनता है। (सत्य)
(च) रेशम–तंतु किसी पादप के तने से प्राप्त होता है। (असत्य)
(छ) पॉलिस्टर एक प्राकृतिक तंतु है। (असत्य)
3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(क) .......... और ......... से पादप तंतु प्राप्त किए जाते हैं।
(ख) .......... और ......... जंतु से मिलने वाले तंतु हैं।
उत्तर: (क) जूट ; सूत , (ख) ऊन ; रेशमी सूत
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4. सही विकल्प को चुनिए–
(क) वैसे वस्त्र के तंतु जो पौधों एवं जंतुओं से प्राप्त होते हैं, कहलाते हैं –
(i) प्राकृतिक तंतु (ii) मानव निर्मित तंतु
(iii) प्राकृतिक तंतु एवं मानव निर्मित तंतु
(iv) इनमें से कोई नहीं।
(ख) मानव निर्मित तंतु हैं–
(i) पॉलिस्टर (ii) नायलॉन
(ग) बिहार के निम्न जिले में जूट अधिक उगाया जाता है–
(i) कटिहार (ii) मधेपुरा
(iii) सहरसा। (iv) उपर्युक्त सभी।
(घ) रेशों से धागा बनाने की प्रक्रिया कहलाती हैं–
(i) कताई (ii) बुनाई
(iii) धुनाई। (iv) रंगाई।
(ङ) धागे से वस्त्र बनाने की विधियां हैं–
(i) बुनाई (ii) बंधाई
(iii) बुनाई एवं बंधाई (iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:–
(क) – (i) प्राकृतिक तंतु,
(ख) – (ii) नायलॉन,
(ग) – (iv) उपर्युक्त सभी,
(घ) – (i) कताई,
(ङ) – (iii) बुनाई एवं बंधाई।
5. रूई तथा जूट (पटसन) पादप के किन भागों से प्राप्त होते हैं?
उत्तर: रूई कपास के फूल वाले भाग से प्राप्त होते हैं एवं जूट (पटसन) पौधे के तने से प्राप्त किया जाता है।
6. नारियल तंतु से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर: नारियल तंतु से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम इस प्रकार हैं–
(१.) रस्सी, (२.) दरी/चटाई.
7. तंतुओं से धागा निर्मित करने की प्रक्रिया स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जूट (पटसन) और कपास के तंतु से धागा बनाने की प्रक्रिया–
पटसन से तंतु प्राप्त करने के लिए जूट को उगाया जाता है। जब पौधे में फूल आने लगते हैं तो उसे काट लिया जाता है। कुछ दिनों तक इसके तनों को पानी में डुबोकर रखा जाता है ताकि रेशों को अच्छी तरह अलग किया जा सके। तत्पश्चात इनको पानी में पटक–पटककर धुलाई किया जाता है, इस प्रकार तंतु प्राप्त होता है। जिस प्रक्रिया को कताई कहते हैं। कताई की प्रक्रिया में रूई की एक पुंज से रेशों को खींचकर ऐंठा जाता है। ऐसा करने पर रेशे आपस में गुथ जाता है और वह धागा में परिवर्तित हो जाता है।
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