1.भोजन कहां से आता है?
संपूर्ण पृथ्वी पर जितने भी जीवधारी प्राणी हैं, उन सभी को शारीरिक पोषण के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन पर निर्भर रहना पड़ता है। इस धरती पर भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवधारी प्राणी निवास करते हैं जिसके लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के भोजन भी प्रकृति में मौजूद हैं। जीवधारियों को भोजन कैसे प्राप्त होता है? इनके लिए यह भोजन कहां से आता है? इस नोटिस में संपूर्ण विश्लेषण किया गया है. कृपया आप बने रहें।
खाद्य पदार्थ –
प्रत्येक जीवधारी प्राणी भोजन के अंतर्गत अनेक प्रकार के चीजों का भक्षण करते हैं, जिन्हें खाद्य पदार्थ कहा जता है।
उदाहरण– रोटी, सब्जी, दाल, भात, दूध, अंडा, मुर्गा, मछली, झींगा, मांस इत्यादि।
खाद्य पदार्थ की पूर्ति –
खाद्य पदार्थ भिन्न–भिन्न प्रकार के होते हैं जिनकी पूर्ति भी भिन्न-भिन्न प्रकार से होती है अर्थात खाद्य सामग्री की पूर्ति अनेक स्रोतों से होते हैं। अंडा, मुर्गा, मछली, मांस आदि जीव–जंतु से प्राप्त होते हैं अर्थात मांसाहार की प्राप्ति जीव–जंतु के मांस से होती है। शाकाहार अर्थात अनाज, सब्जी, फल आदि की पूर्ति पेड़–पौधे से होती है। जैसे भात के लिए कच्चे चावल को उबाला जाता है लेकिन इस चावल की प्राप्ति धान से होती है और खेतों में धान के पौधे लगे होते हैं। यथार्थ में भात की पूर्ति पौधे से होती है। इसी तरह से रोटी, दाल, फल, सब्जी आदि की पूर्ति इनके पेड़–पौधों से होती है। दूध पशु से प्राप्त होता है लेकिन दूध शाकाहारी खाद्य पदार्थ है।
नमक और मसाले की प्राप्ति :–
यदि किसी पकी हुई खाद्य पदार्थ जैसे– दाल, सब्जी में संपूर्ण मसाले दी हुई हो लेकिन नमक नहीं हो तो वह खाद्य पदार्थ स्वादहीन लगता है। अतः खाद्य पदार्थ में नमक अत्यावश्यक है। इस नमक की पूर्ति समुद्र से होती है, समुद्र में खारा पानी होता है अर्थात समुद्र का पानी में नमक घुली हुई अवस्था में होती है। आसवन विधि के द्वारा समुद्री पानी से नमक को अलग किया जाता है तत्पश्चात इस नमक को वैज्ञानिक तकनीकी के अनुसार शुद्ध किया जाता है अर्थात नमक में उपस्थित घातक जीवाणुओं (बैक्टीरिया) को नष्ट किया जाता है। फिर इस शुद्ध नमक को जनता के द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। इस प्रकार नमक की प्राप्ति होती है. साथ ही नमक खनिज स्रोतों से भी प्राप्त होता है।
हमारे भारत देश में बहुत प्रकार के मसाले पाए जाते हैं जो अन्य किसी देश में मिल पाना दुर्लभ है। हमारा देश मसाले की उत्पत्ति का मूल जड़ है, अतः यहां विभिन्न प्रकार के मसाले हैं। इन मसालों की पूर्ति पौधों से होती है। आजवाइन, जीरा, मरीच, हल्दी आदि मसाला के उदाहरणार्थ के अंतर्गत आते हैं। कच्ची हल्दी (गांठ वाली हल्दी) को सुखाकर एवं अन्य विधि के द्वारा उसे हल्दी पाउडर में परिवर्तित कर दिया जाता है। इसी प्रकार से अन्य सारे मसाले को भी विधिवत उसके चूर्ण में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रकार से मसाले की प्राप्ति होती है।
भोजन के मुख्य स्रोत :–
पौधे हमारे भोजन का एक मुख्य स्रोत है। पौधे के विभिन्न भाग का उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में किया जाता है। किसी पौधे के पत्तियों को भोजन के रूप में खाते हैं। उसी प्रकार किसी पौधे के तना को, किसी पौधे के फल को, किसी पौधे के जड़ को, किसी पौधे के फूल को, किसी पौधे के पत्ते को भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
कुछ ऐसे पौधे हैं जिनके दो या दो से अधिक भागों को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है। भोजन के रूप में खाए जाने वाले पौधे के विभिन्न भाग इस तालिका के अंतर्गत दर्शाए गए हैं–
खाद्य पदार्थ के रूप में अंकुरित बीज :–
बदाम या मूंग को जल से भरे पात्र में डालकर 24 घंटा फुलने देना है. अब उस फूले हुए बीज को छांककर गीले कपड़े में लपेट कर रख देना है। एक दिन के बाद कपड़ा खोलकर देखने से उस बीज के बीच से एक छोटी सी सफेद संरचना बाहर निकल आती है, जिसे अंकुर कहा जाता है। जिस बीज में अंकुर निकल आता है, उसे अंकुरित बीज कहा जाता है।
अंकुरित बीज में प्रोटीन की मात्रा अधिकांशतः पाई जाती है। इस अंकुरित बीज को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है–
खाद्य पदार्थ के रूप में शहद :–
शहद का स्रोत मधुमक्खी का छत्ता है। मधुमक्खियां फूलों से मकरकंद (मीठा रस) एकत्रित करती है और इसे अपने छत्ते में जमा करती है। मधुमक्खियां चार से पांच महीने में मकरकंद को इकट्ठा कर एक बहुत बड़े छत्ते का रूप दे देती है। मधुमक्खियां मकरकंद को अपने पेट में एक एंजाइम की सहायता से बचाकर शहद बना लेती है। यह शहद फफूंद, बैक्ट्रिया (जीवाणु) लगकर खराब नहीं होता। मधुमक्खियां इस शहद का भंडारण कर लेती है ताकि पूरे वर्ष इसका उपयोग किया जा सके। मधुमक्खी के छत्ते में उपस्थित शहद को हम खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग करते हैं।
जंतु क्या खाते हैं?
जंतु भिन्न–भिन्न प्रकार के होते हैं, जिनका आहार भी भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। आहार भक्षण के अंतर्गत जीव–जंतुओं को तीन श्रेणी में बांटा गया है, जो निम्नवत है–
(i) शाकाहारी
(ii) मांसाहारी
(iii) सर्वाहारी
(i) शाकाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो केवल पौधे व उसके उत्पाद को भोजन के रूप में लेते हैं, उसे शाकाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– मनुष्य, गाय, भैंस, बकरी, घोड़ा, बंदर, हाथी आदि।
(ii) मांसाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो दूसरे जंतुओं को भोजन के रूप में लेते हैं अर्थात उनके मांस का भक्षण करते हैं, उन्हें मांसाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, नेवला ऊदबिलाव आदि।
(iii) सर्वाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो भोजन के रूप में पौधे एवं अन्य जीव–जंतु का मांस खाते हैं उन्हें सर्वाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– कुत्ता, बिल्ली, कौवे, रैकून, भालू, सूअर आदि।
कुछ कीट–पतंग ऐसे हैं जो शाकाहारी हैं, कुछ मांसाहारी हैं एवं कुछ सर्वाहारी हैं। मधुमक्खी, तितली आदि शाकाहारी हैं जबकि मक्खी, मच्छर आदि सर्वाहारी हैं।
कुछ जीव जंतु एवं उसके द्वारा भक्षण किए जाने वाले आहार निम्न तालिका के अंतर्गत दर्शाए गए हैं–
पेड़–पौधे क्या खाते हैं?प्रकाश संश्लेषण–
पेड़–पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना आहार तैयार करते हैं। पौधे की पत्तियों में हरे रंग का पदार्थ होता है, जो सूर्य की रोशनी में जल की सहायता से अपने भोजन का निर्माण कर लेते हैं। पौधे की पत्तियों एवं अन्य हरे भागों में भोजन का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया के उपरांत होता है, इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।