1/31/22

कक्षा6 NCERT विज्ञान अध्याय-1 "भोजन कहां से आता है?" का संपूर्ण प्रश्न–उत्तर

 

अभ्यास

1. क्या सभी जीव–जंतु एक ही प्रकार का भोजन करते हैं?
उत्तर: नहीं, सभी जीव जंतु भिन्न–भिन्न प्रकार के भोजन ग्रहण करते हैं। कोई जीव–जंतु शाकाहारी होते हैं, तो कोई मांसाहारी, तो कोई सर्वाहारी प्रकार के जीव–जंतु होते हैं।

2. चार पौधों के नाम लिखिए तथा बताइए उनके कौन–से भाग का उपयोग हम भोजन में करते हैं?
उत्तर: चार पौधों के नाम निम्न सारणी में दर्शाया गया है, जिनके विभिन्न भागों का उपयोग हम भोजन के रूप में करते हैं–

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3. चार जंतुओं के नाम लिखिए और उनसे प्राप्त भोज्य पदार्थों को बताइए।
उत्तर: चार जंतुओं के नाम एवं उनसे प्राप्त भोज्य पदार्थों का नाम निम्नवत है–



4. दूध से निर्मित भोज्य पदार्थों का नाम लिखिए।
उत्तर: दूध से निर्मित भोज्य पदार्थों के नाम निम्नवत हैं–
  1. दही (curd)
  2. मक्खन (butter)
  3. घी (ghee)
  4. पेड़ा (peda)
  5. पनीर (cheese)
  6. खुआ/खोआ (khua/khoa)
  7. बर्फ–मलाई (ice–cream)
  8. छैना मुर्की (chena murki)
  9. खीर (kheer)
  10. सेवई (vermicelli).

5.  मिलान कीजिए

      कॉलम–1                  कॉलम–2
क. शाकाहारी             क. मांसाहारी जंतु है।
ख. शेर और बाघ         ख. जंतु उत्पाद है।
ग. दूध, अण्डा, मांस     ग. मधुमक्खी के छत्ते से प्राप्त होता है।
घ. शहद                    घ. पादप एवं पादप उत्पाद खाते हैं।

उत्तर: कॉलम–1       कॉलम–2
         (क) –––––––> (घ)
         (ख) –––––––> (क)
         (ग) –––––––> (ख)
         (घ) –––––––> (ग).


6. दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति उपयुक्त शब्दों से कीजिए ।
( गन्ना, सर्वाहारी, ऊर्जा, शाकाहारी )

(क) हमें शक्कर .............. से प्राप्त होती है।
(ख) बंदर ..................  जंतु है।
(ग) भोजन से हमें .................... मिलती है।
(घ) मनुष्य एवं तिलचट्टा .................. जंतु हैं।

उत्तर: (क) गन्ना, (ख) शाकाहारी, (ग) ऊर्जा,  (घ) सर्वाहारी।

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7. दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए:

(शाकाहारी, पादप, दूध, मांसाहारी)

(क) बाघ ............ है क्योंकि यह केवल मांस खाता है।
(ख) हिरण केवल पादप–उत्पाद खाता है और इसलिए इसे .............. कहते हैं।
(ग) तोता केवल ........... उत्पाद खाता है।
(घ) जो ................. हम पीते हैं वह प्रायः गाय, भैंस या बकरी से प्राप्त होता है, इसलिए यह जंतु–उत्पाद है।
उत्तर: (क) मांसाहारी, (ख) शाकाहारी, (ग) पादप, (घ) दूध.

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1/27/22

कक्षा6 NCERT विज्ञान अध्याय 1 "भोजन कहां से आता है?" का संपूर्ण सटीक नोट्स

1.भोजन कहां से आता है?

 संपूर्ण पृथ्वी पर जितने भी जीवधारी प्राणी हैं, उन सभी को शारीरिक पोषण के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन पर निर्भर रहना पड़ता है। इस धरती पर भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवधारी प्राणी निवास करते हैं जिसके लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के भोजन भी प्रकृति में मौजूद हैं। जीवधारियों को भोजन कैसे प्राप्त होता है? इनके लिए यह भोजन कहां से आता है? इस नोटिस में संपूर्ण विश्लेषण किया गया है. कृपया आप बने रहें।

खाद्य पदार्थ –

प्रत्येक जीवधारी प्राणी भोजन के अंतर्गत अनेक प्रकार के चीजों का भक्षण करते हैं, जिन्हें खाद्य पदार्थ कहा जता है।
उदाहरण– रोटी, सब्जी, दाल, भात, दूध, अंडा, मुर्गा, मछली, झींगा, मांस इत्यादि।

खाद्य पदार्थ की पूर्ति –

खाद्य पदार्थ भिन्न–भिन्न प्रकार के होते हैं जिनकी पूर्ति भी भिन्न-भिन्न प्रकार से होती है अर्थात खाद्य सामग्री की पूर्ति अनेक स्रोतों से होते हैं। अंडा, मुर्गा, मछली, मांस आदि जीव–जंतु से प्राप्त होते हैं अर्थात मांसाहार की प्राप्ति जीव–जंतु के मांस से होती है। शाकाहार अर्थात अनाज, सब्जी, फल आदि की पूर्ति पेड़–पौधे से होती है। जैसे भात के लिए कच्चे चावल को उबाला जाता है लेकिन इस चावल की प्राप्ति धान से होती है और खेतों में धान के पौधे लगे होते हैं। यथार्थ में भात की पूर्ति पौधे से होती है। इसी तरह से रोटी, दाल, फल, सब्जी आदि की पूर्ति इनके पेड़–पौधों से होती है। दूध पशु से प्राप्त होता है लेकिन दूध शाकाहारी खाद्य पदार्थ है।

नमक और मसाले की प्राप्ति :–

यदि किसी पकी हुई खाद्य पदार्थ जैसे– दाल, सब्जी में संपूर्ण मसाले दी हुई हो लेकिन नमक नहीं हो तो वह खाद्य पदार्थ स्वादहीन लगता है। अतः खाद्य पदार्थ में नमक अत्यावश्यक है। इस नमक की पूर्ति समुद्र से होती है, समुद्र में खारा पानी होता है अर्थात समुद्र का पानी में नमक घुली हुई अवस्था में होती है। आसवन विधि के द्वारा समुद्री पानी से नमक को अलग किया जाता है तत्पश्चात इस नमक को वैज्ञानिक तकनीकी के अनुसार शुद्ध किया जाता है अर्थात नमक में उपस्थित घातक जीवाणुओं (बैक्टीरिया) को नष्ट किया जाता है। फिर इस शुद्ध नमक को जनता के द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। इस प्रकार नमक की प्राप्ति होती है. साथ ही नमक खनिज स्रोतों से भी प्राप्त होता है।
               हमारे भारत देश में बहुत प्रकार के मसाले पाए जाते हैं जो अन्य किसी देश में मिल पाना दुर्लभ है। हमारा देश मसाले की उत्पत्ति का मूल जड़ है, अतः यहां विभिन्न प्रकार के मसाले हैं। इन मसालों की पूर्ति पौधों से होती है। आजवाइन, जीरा, मरीच, हल्दी आदि मसाला के उदाहरणार्थ के अंतर्गत आते हैं। कच्ची हल्दी (गांठ वाली हल्दी) को सुखाकर एवं अन्य विधि के द्वारा उसे हल्दी पाउडर में परिवर्तित कर दिया जाता है। इसी प्रकार से अन्य सारे मसाले को भी विधिवत उसके चूर्ण में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रकार से मसाले की प्राप्ति होती है।

भोजन के मुख्य स्रोत :–

पौधे हमारे भोजन का एक मुख्य स्रोत है। पौधे के विभिन्न भाग का उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में किया जाता है। किसी पौधे के पत्तियों को भोजन के रूप में खाते हैं। उसी प्रकार किसी पौधे के तना को, किसी पौधे के फल को, किसी पौधे के जड़ को, किसी पौधे के फूल को, किसी पौधे के पत्ते को भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
              कुछ ऐसे पौधे हैं जिनके दो या दो से अधिक भागों को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है। भोजन के रूप में खाए जाने वाले पौधे के विभिन्न भाग इस तालिका के अंतर्गत दर्शाए गए हैं–


खाद्य पदार्थ के रूप में अंकुरित बीज :–

बदाम या मूंग को जल से भरे पात्र में डालकर 24 घंटा फुलने देना है. अब उस फूले हुए बीज को छांककर गीले कपड़े में लपेट कर रख देना है। एक दिन के बाद कपड़ा खोलकर देखने से उस बीज के बीच से एक छोटी सी सफेद संरचना बाहर निकल आती है, जिसे अंकुर कहा जाता है। जिस बीज में अंकुर निकल आता है, उसे अंकुरित बीज कहा जाता है।
       अंकुरित बीज में प्रोटीन की मात्रा अधिकांशतः पाई जाती है। इस अंकुरित बीज को खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है–




खाद्य पदार्थ के रूप में शहद :–

शहद का स्रोत मधुमक्खी का छत्ता है। मधुमक्खियां फूलों से मकरकंद (मीठा रस) एकत्रित करती है और इसे अपने छत्ते में जमा करती है। मधुमक्खियां चार से पांच महीने में मकरकंद को इकट्ठा कर एक बहुत बड़े छत्ते का रूप दे देती है। मधुमक्खियां मकरकंद को अपने पेट में एक एंजाइम की सहायता से बचाकर शहद बना लेती है। यह शहद फफूंद, बैक्ट्रिया (जीवाणु) लगकर खराब नहीं होता। मधुमक्खियां इस शहद का भंडारण कर लेती है ताकि पूरे वर्ष इसका उपयोग किया जा सके। मधुमक्खी के छत्ते में उपस्थित शहद को हम खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग करते हैं।



जंतु क्या खाते हैं?

जंतु भिन्न–भिन्न प्रकार के होते हैं, जिनका आहार भी भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। आहार भक्षण के अंतर्गत जीव–जंतुओं को तीन श्रेणी में बांटा गया है, जो निम्नवत है–
(i) शाकाहारी
(ii) मांसाहारी
(iii) सर्वाहारी


(i) शाकाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो केवल पौधे व उसके उत्पाद को भोजन के रूप में लेते हैं, उसे शाकाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– मनुष्य, गाय, भैंस, बकरी, घोड़ा, बंदर, हाथी आदि।


(ii) मांसाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो दूसरे जंतुओं को भोजन के रूप में लेते हैं अर्थात उनके मांस का भक्षण करते हैं, उन्हें मांसाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, नेवला ऊदबिलाव आदि।




(iii) सर्वाहारी –
ऐसे जीव–जंतु जो भोजन के रूप में पौधे एवं अन्य जीव–जंतु का मांस खाते हैं उन्हें सर्वाहारी कहे जाते हैं।
उदाहरण– कुत्ता, बिल्ली, कौवे, रैकून, भालू, सूअर आदि।
       कुछ कीट–पतंग ऐसे हैं जो शाकाहारी हैं, कुछ मांसाहारी हैं एवं कुछ सर्वाहारी हैं। मधुमक्खी, तितली आदि शाकाहारी हैं जबकि मक्खी, मच्छर आदि सर्वाहारी हैं।
           कुछ जीव जंतु एवं उसके द्वारा भक्षण किए जाने वाले आहार निम्न तालिका के अंतर्गत दर्शाए गए हैं–


पेड़–पौधे क्या खाते हैं?प्रकाश संश्लेषण–

पेड़–पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना आहार तैयार करते हैं। पौधे की पत्तियों में हरे रंग का पदार्थ होता है, जो सूर्य की रोशनी में जल की सहायता से अपने भोजन का निर्माण कर लेते हैं। पौधे की पत्तियों एवं अन्य हरे भागों में भोजन का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया के उपरांत होता है, इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।


1/21/22

कक्षा6 (BSEB) NCERT भूगोल अध्याय 4 "पृथ्वी के प्रमुख रूप" संपूर्ण प्रश्न–उत्तर

 1. सही विकल्प को चुनें।

i. बिहार में सोन नदी किस तरह के क्षेत्र से होकर गुजरती है?
(क) पहाड़ी क्षेत्र        (ख) पठारी क्षेत्र
(ग) मैदानी क्षेत्र       (घ) रेगिस्तानी क्षेत्र

ii. बाल्मीकीनगर बिहार के किस क्षेत्र में अवस्थित है?
(क) पश्चिमी क्षेत्र        (ख) पूर्वी क्षेत्र
(ग) दक्षिणी क्षेत्र         (घ) उत्तरी क्षेत्र

iii. धान की फसल के लिए उपयुक्त मिट्टी है–
(क) बलुआही मिट्टी     (ख) चिकनी मिट्टी
(ग) दोमट मिट्टी।         (घ) पर्वतीय मिट्टी

iv. पठार के ऊपर की सतह होती है–
(क) नुकीला।             (ख) सपाट
(ग) संकीर्ण।              (घ) ढालदार

v. पर्वतों के कितने प्रकार होते हैं?
(क) चार                   (ख) पांच
(ग) तीन                   (घ) दो

नोट:–उपर्युक्त प्रश्नों के विकल्प में हरे रंग से रंगे हुए विकल्प प्रश्नों के उत्तर हैं।

2. खाली जगहों को भरें–
i. बिहार का अधिकतर भाग .......... नदी के दोनों ओर मैदानी भाग के रूप में फैला है।
ii. .......... को संसार का छत कहा जाता है।
iii. पहाड़ों की लंबी श्रृंखला को ........... श्रेणी कहते हैं।
iv. शिमला और कश्मीर देश के प्रमुख ............ पर्यटन स्थल के उदाहरण हैं।
v. प्राकृतिक वातावरण के बदलते स्वरूप का मुख्य कारण बढ़ती ............ है

उत्तर :– (i) गंगा,  (ii) पामीर का पठार,  (iii) पर्वत,  (iv) पर्यटक केंद्र,  (v) जनसंख्या।

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3. सही मिलान करें।
(i) भ्रंशोत्थ पर्वत           (क) दक्कन क्षेत्र
(ii) वलित पर्वत            (ख) सतपुड़ा पहाड़ी
(iii) प्राचीन पठार          (ग) हंगरी का मैदान
(iv) निक्षेपात्मक मैदान   (घ) हिमालय
उत्तर :–
(i) भ्रंशोत्थ पर्वत –––– (ख) सतपुड़ा पहाड़ी
(ii) वलित पर्वत ––––  (घ) हिमालय
(iii) प्राचीन पठार –––  (क) दक्कन क्षेत्र
(iv) निक्षेपात्मक मैदान– (ग) हंगरी का मैदान

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें–
(i) मैदानी क्षेत्र की क्या-क्या विशेषताएं होती हैं?
उत्तर: मैदानी क्षेत्र की विशेषताएं निम्नलिखित हैं–
  1. मैदानी क्षेत्र में जीवन–यापन के लिए भोजन, जल, आवास एवं परिवहन की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होते हैं।
  2. मैदानी क्षेत्र में सड़कमार्ग और रेलमार्ग का निर्माण करना अति सुलभ होता है।
  3. मैदानी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के मिट्टी पाए जाते हैं। जैसे–दोमट मिट्टी, चिकनी मिट्टी, दलदली मिट्टी आदि जो विभिन्न प्रकार के फसल के लिए बहुत उपजाऊ मिट्टी है।
  4. मानव जीवन के लिए सर्वोत्कृष्ट स्थल के भाग– मैदानी क्षेत्र हैं।
(ii) सड़क निर्माण का कार्य किस क्षेत्र में आसान होगा और क्यों?
उत्तर: सड़क निर्माण का कार्य मैदानी क्षेत्र में आसान होगा। क्योंकि मैदानी क्षेत्र में मिट्टी की बहुलता होती है जिस पर सड़क निर्माण के लिए किसी विशेष प्रकार की मशीन की आवश्यकता नहीं होती जिससे खर्च भी कम पड़ता है। यदि पठारीय क्षेत्र या पर्वतीय क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य आरंभ किया जाए तो विशेष मशीन द्वारा पहाड़ को तोड़ कर सड़कमार्ग बनाने में मैदानी क्षेत्र की अपेक्षा ज्यादा खर्च पड़ेगा और कार्य विस्तार भी बढ़ जाएगा। अतः सड़कमार्ग का निर्माण कार्य पठार या पर्वत की अपेक्षाकृत मैदानी क्षेत्र में अधिक सुलभ होगा।

(iii) पर्वत,पठार और मैदान के दोहन से इस पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: पर्वत, पठार और मैदान के दोहन से सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पर्यावरण पर पड़ा है। जनसंख्या वृद्धि के कारण आवास हेतु पहाड़ों पर्वतों को काटा जा रहा है जिससे जंगल की भी सफाई होती जा रही है। फलतः जंगली जीव–जंतु, पशु–पक्षी की संख्या में कमी होती जा रही है जिसका मुख्य कारण मैदान, पठार, पर्वत का दोहन है। जंगल की छटनी के कारण बारिश का भी अभाव होने लगा है जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों पर हो रहा है। आज पृथ्वी पर प्रदूषण का एक मुख्य कारण के अंतर्गत मैदान, पर्वत, पठार का दोहन भी शामिल है।

(iv) मैदान में ही अधिक लोग क्यों बसते हैं?
उत्तर: मैदान में जीवन–पोषण हेतु मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सहूलियत से हो जाती है। पठार और पर्वत की अपेक्षा मैदान न ही अधिक ऊंचा और न ही अधिक नीचा होता है अर्थात समतल होता है। जिससे यहां आवास, कृषि कार्य, अन्य सारी दैनिक क्रियाकलाप बहुत सुलभ हो जाता है। सड़कमार्ग, रेलमार्ग हेतु कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है। अतः जीवन की अधिकांशतः आवश्यकताओं की पूर्ति मैदानी क्षेत्र से सुलभ हो पाता है, इसलिए मैदानी क्षेत्र में अधिक लोग बसना पसंद करते हैं।

(v) पर्वत कितने प्रकार के होते हैं? सभी के नाम लिखें।
उत्तर: पर्वत तीन प्रकार के होते हैं, जो निम्नवत है–
  1. वलित पर्वत
  2. भ्रंशोत्थ पर्वत
  3. ज्वालामुखी पर्वत।
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1/17/22

कक्षा 6 NCERT भूगोल अध्याय–4 ‘पृथ्वी के प्रमुख स्थल’ संपूर्ण नोट्स हिंदी में

 4. पृथ्वी के प्रमुख रूप

हमारी पृथ्वी के 71% भूभाग पर जल का विस्तार है जबकि 29% भूभाग पर स्थल है। यथार्थ में पृथ्वी पर लगभग एक–चौथाई हिस्सा हीं स्थलमंडल है। पृथ्वी पर संपूर्ण स्थल के विभिन्न रूप एवं आकृतियां हैं। स्थल का विभिन्न रूप एवं आकृति होने के कारण इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस नोट्स में इन्हीं स्थल रूप एवं विभिन्न स्थलाकृतियां के बारे में विश्लेषण किया गया है। कृपया आप बने रहें।

Gggggggggggggg

Neeraj Manish Ganesh
Sameli Katihar Bihar
Chakla Purnia Uttar Pradesh
Kursela Bhagalpur Jharkhand


पृथ्वी पर स्थल के तीन स्थलाकृतियाँ हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जो निम्नवत है–
(1.) मैदान
(2.) पठार
(3.) पर्वत
मैदान,पठार और पर्वत/पहाड़

(1.) मैदान :–
पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जिसकी सतह समतल होती है एवं वह नीची भूमि (lowland) का क्षेत्र होता है, उसे मैदान कहते हैं।
            मैदान की प्रमुख विशेषता है कि यह अपने आस–पास के पठार तथा पर्वत से ऊंचे कभी नहीं हो सकते जबकि यह समुद्र से ऊंचे या नीचे हो सकते हैं।
  • मैदान का निर्माण प्रायः एक ही प्रकार की मिट्टी से हुआ है, जिसमें थोड़ा बहुत स्थानीय अंतर हो सकता है।
  • मैदानी क्षेत्र में ही कृषि कार्य जैसे–अनाजों का उत्पादन होता है।
  • मैदानी क्षेत्र की भूमि समतल है अर्थात यह न अधिक ऊंची है और न हीं अधिक नीची है।
  • मैदानी क्षेत्र में थोड़ा अलग–अलग प्रकार की मिट्टी है, जैसे– चिकनी मिट्टी, दोमट मिट्टी, दलदली मिट्टी आदि।
  • मैदानी क्षेत्र का चिकनी मिट्टी धान की फसल के लिए प्रमुख मिट्टी मानी जाती है, क्योंकि इस मिट्टी में धान की फसल खूब उपजती है। चिकनी मिट्टी को केवाल मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है।
  • दलदली मिट्टी में दलहन की फसल खूब उपजती है जिस कारण इस मिट्टी को दलदली मिट्टी के नाम से जाना जाता है।
  • मैदानी क्षेत्र में धान, गेहूं, मक्का, चना, ईख, मूंग, तंबाकू इत्यादि जैसे अन्य फसल भी उपजते हैं। साथ हीं विभिन्न तरह के सब्जी की खेती, फल की खेती इत्यादि भी होती है।
  • मैदानी क्षेत्र में जीवन–यापन के लिए भोजन, जल, आवास एवं परिवहन की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होते हैं।
  • स्थलमंडल के मैदानी क्षेत्र में ही सड़क मार्ग, रेल मार्ग का निर्माण किया जाता है।
  • बिहार में मैदानी क्षेत्र अधिकतर गंगा नदी के दोनों तरफ फैला हुआ है। साथ ही ऐसे मैदान पश्चिम में पंजाब से लेकर पूरब में असम तक मिलते हैं जो सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र के दोनों तरफ फैले हुए हैं। इसलिए इस प्रकार के मैदानी इलाके को सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र का मैदान भी कहते हैं। गंगा/सतलज/ब्रह्मपुत्र के दोनों तरफ के ये मैदानी क्षेत्र अनाज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • मैदान तीन प्रकार के होते हैं– अपरदन मूलक मैदान, निक्षेपण मूलक मैदान, रचनात्मक मैदान।
मैदानी क्षेत्र/भाग कक्षा6 भूगोल
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मैदान के प्रकार :–
मैदान मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नवत है–
(१.) अपरदन मूलक मैदान
(२.) निक्षेपण मूलक मैदान
(३.) रचनात्मक मैदान

(१.) अपरदन मूलक मैदान –
अपरदन की क्रिया के फलस्वरूप जिस मैदान का निर्माण होता है उसे अपरदन मूलक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– फिनलैंड का मैदान, उत्तर–यूरोप के पूर्वी क्षेत्र का मैदान, कनाडा के पूर्वी क्षेत्र का मैदान।

(२.) निक्षेपण मूलक मैदान –
निक्षेपण की क्रिया के फलस्वरूप नदियों, हिमानी, वायु तथा सागरीय तरंगों से जिस मैदान का निर्माण होता है उसे निक्षेपन मूलक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– हंगरी का मैदान, केरल के तट के मैदान।

(३.) रचनात्मक मैदान –
पृथ्वी की आंतरिक हलचलों के कारण जिस मैदान का निर्माण होता है उसे रचनात्मक मैदान कहते हैं।
उदाहरण– उत्तरी अमेरिका का मध्यवर्ती मैदान।

(2.) पठार :–

पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जो मैदान से ऊंची होती है एवं जिसका सतह सपाट होता है उसे पठार कहते हैं।
उदाहरण– छोटा नागपुर का पठार, तिब्बत का पठार, दक्कन का पठार, पामीर का पठार आदि।
  • पठार कुछ सौ किलोमीटर से कई हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक के होते हैं।
  • हमारे देश के दक्कन का पठार एवं छोटा नागपुर का पठार हजारों किलोमीटर की ऊंचाई तक फैले हैं।
  • संसार का सबसे ऊंचा पठार ‘तिब्बत का पठार’ है जिसकी ऊंचाई लगभग 45 किलोमीटर की है।
  • पामीर के पठार को ‘संसार की छत’ कहा जाता है।

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(3.) पर्वत :–

पृथ्वी पर की ऐसी स्थलाकृति जो पठार से ऊंची होती है एवं जिसका सतह निकटवर्ती क्षेत्रों से बहुत संकीर्ण होता है उसे पर्वत कहते हैं।
              पर्वत की यह संकीर्णता लंबी श्रृंखला के रूप में भी फैले होते हैं जिस श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहा जाता है।
   
            कुछ पर्वत बहुत ऊंचे होने के कारण यहां बर्फ जमी रहती है और इनसे कई नदियां निकलती है जैसे– भारत में हिमालय पर्वत पर बर्फ जमी रहती है एवं इनसे कई नदियां भी निकलती है। पर्वत से निकलने वाली नदियों के जल का उपयोग सिंचाई तथा पनबिजली उत्पादन में किया जाता है। पर्वत पर्यावरण संरक्षण एवं वर्षा कराने में भी सहायक होते हैं मैदानी क्षेत्र की अपेक्षाकृत पर्वत पर खेती करना बहुत कठिन होता है, खेती करने के लिए पर्वत पर सीढ़ीदार खेत बनाने पड़ते हैं। अरावली पर्वत की ऊंचाई कम होने के कारण इसके शीर्ष भाग पर बर्फ नहीं जमती है तब पर भी अरावली पर्वत से नदियां निकलती है क्योंकि वहां पर यह नदियां वर्षा जल के कारण निकलती है। पर्वत भिन्न-भिन्न आकार के होते हैं, कम ऊंचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहते हैं। बिहार के राजगीर की पहाड़ी, मंदार हिल की पहाड़ी, बराबर की पहाड़ी, गिरियक की पहाड़ी, हवेलीखड़गपुर की पहाड़ी आदि इनके उदाहरण है।
पर्वत के शीर्ष पर बर्फ जमे होने के कारण लोग यहां स्कीईंग करते हैं यह पर्यटक के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। शिमला और कश्मीर में पर्यटक इस का खूब आनंद लेते हैं।
               पर्वत पर घने जंगल, अत्यधिक ऊंचाई एवं परिवहन का अभाव होने के कारण यहां जीवन जीना मैदानों की अपेक्षाकृत कठिन है। पर्वत पर घने जंगल होने के कारण यह वर्षा कराने में भी अधिक सहायक होते हैं जिससे पर्यावरण का संरक्षण होता है। यहां कई प्रकार की जड़ी–बूटी, वनस्पतियां औषधियां, चारा, जीव–जंतु आदि पाए जाते हैं।
  • पर्वत मैदान और पठार दोनों से ऊंचा होता है।
  • कम ऊंचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहा जाता है।
  • पृथ्वी पर जल वर्षा का मुख्य कारण पर्वत पर के घने जंगल हैं।
  • पर्वत पर खेती करने के लिए सीढ़ीदार खेत बनाने पड़ते हैं।
  • पर्वत तीन प्रकार के होते हैं– वलित पर्वत, भ्रंशोत्थ पर्वत और ज्वालामुखी पर्वत।
सीढ़ीदार खेत
बर्फ पर स्कीइंग करना


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पर्वत के प्रकार :–

पर्वत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नवत है–
(१.) वलित पर्वत
(२.) भ्रंशोत्थ पर्वत
(३.) ज्वालामुखी पर्वत
हिमालय पर स्थित माउंट एवरेस्ट



(१.) वलित पर्वत –

ऐसा पर्वत जिसका सतह उबड़–खाबर हो एवं शिखर अर्थात सबसे ऊंची चोटी का आकार शंक्वाकार हो उसे वलित पर्वत कहते हैं।
उदाहरण– हिमालय पर्वत (भारत), एंडीज पर्वत (दक्षिण अमेरिका).

(२.) भ्रंशोत्थ पर्वत –

ऐसा पर्वत जो पृथ्वी के आंतरिक हलचलों के कारण पड़ने वाली दरारों के बीच वाले भाग से उत्पन्न होते हैं, उसे भ्रंशोत्थ पर्वत कहा जाता है।
उदाहरण– भारत का सतपुड़ा पहाड़.

(३.) ज्वालामुखी पर्वत –

ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली लावा एवं अन्य पदार्थों का ठंडा होकर जम जाने से जिस पर्वत का निर्माण होता है उसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं।
उदाहरण– विसुवियत पर्वत (इटली).

सक्रिय ज्वालामुखी पर्वतऐसा ज्वालामुखी पर्वत जिसमें हमेशा विस्फोट होता रहता है, उसे सक्रिय ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं।

उदाहरण– भारत के अंडमान निकोबार के बैरन आईलैंड में पाए जाने वाले पर्वत, सक्रिय ज्वालामुखी पर्वत के उदाहरण हैं।


मैदान, पठार और पर्वत का बदलता स्वरूप :–
मैदान, पठार और पर्वत के जिस गुण अथवा विशेषता के कारण इसे मैदान, पठार एवं पर्वत के रूप में वर्गीकृत किया गया है अब वे सब विशेषता धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं। अब मैदान, पठार और पर्वत पहले जैसे नहीं रह गए इसका मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या है। अब लोग पहाड़ों पर बसने लगे भोजन, आवास, वस्त्र की पूर्ति के लिए, सड़क निर्माण की पूर्ति के लिए पठारों और पहाड़ों को काटा जा रहा है। यहां के वनों को काटा जा रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती जा रही है। मानव जीवन के बहुत आवश्यकता की पूर्ति पठारों, पहाड़ों से होने लगी है फलतः इसे काटा जा रहा है। इसका खूब दोहन होता जा रहा है, जिससे अब पहाड़, पठार विलुप्त होते जा रहे हैं। इन सब की प्राकृतिक सुंदरता भी घटती जा रही है। अतः मैदान, पठार और पर्वत अपनी विशेषता को खो रहे हैं और इनके स्वरूप में रूपांतरण होते चले जा रहे हैं। मैदानी क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए, कल–कारखानों के लिए, आवासीय कार्यों के लिए, अन्य जैसी दैनिक दिनचर्याओं के लिए, भू–जल का भारी उपभोग हो रहा है। जल का इस तरह उपयोग होने से अनुमान है कि आने वाली पीढ़ी को भारी जल समस्या का सामना करना पड़ेगा।

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