1/10/22

कक्षा 6 NCERT भूगोल “3.पृथ्वी के परिमंडल” संपूर्ण सटीक नोट्स

 

3. पृथ्वी के परिमंडल

परिमंडल–

पृथ्वी पर का ऐसा क्षेत्र जहां समग्र जीवधारियों के जीवन एवं पोषण के लिए हवा, जल, भोजन उपलब्ध हो साथ ही अनुकूल परिस्थितियां, अनुकूल वातावरण मौजूद हों, उसे परिमंडल कहते हैं।
          संपूर्ण पृथ्वी पर ऐसा क्षेत्र एकमात्र पृथ्वी की ऊपरी सतह है।

समस्त जीवधारी प्राणियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वायु है। कोई भी मनुष्य या जीवधारी प्राणी भोजन के बिना, जल के बिना कई दिन या महीनों भर जीवित रह सकता है लेकिन हवा के बिना एक क्षण भी जीवन संभव नहीं है। पृथ्वी ग्रह को छोड़कर अन्य ग्रह या उपग्रह पर हवा और पानी की अनुपस्थिति के कारण वहां जीवन संभव नहीं है। पृथ्वी पर हवा,जल के साथ-साथ जीव–पोषण के लिए उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल वातावरण, अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। इसलिए हमारी पृथ्वी अन्य ग्रह की अपेक्षा अद्वितीय (unique) है।
         पृथ्वी ग्रह पर जीवधारियों के लिए हवा की पूर्ति किस क्षेत्र से होती है? जल का पूर्ति किस क्षेत्र से होता है एवं भोजन कहां से मिलता है? चलिए जानते हैं–

पृथ्वी पर जीव धारियों के लिए हवा, जल और भोजन की प्राप्ति जैवमंडल से होती है। जैव मंडल के तीन विभाग हैं– स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल। स्थलमंडल से भोजन एवं आवास की पूर्ति, वायुमंडल से वायु व महत्वपूर्ण गैसों की पूर्ति एवं जल मंडल से जल की पूर्ति होती है। इन तीनों मंडल (जलमंडल,वायुमंडल और स्थल मंडल) के सम्मिलित रूप को जैवमंडल कहा जाता है। अतः कहा जा सकता है कि पृथ्वी पर जीव धारियों के जीवन की आवश्यक पूर्ति जैवमंडल से संभव हो पाती है। जैवमंडल पर हीं जीवन पनपता है।

जैव मंडल –

पृथ्वी पर तीन परिमंडल पाए जाते हैं–स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल इन तीनों परिमंडल के सम्मिलित रूप को जैवमंडल कहा जाता है।
        जैव मंडल के तीन विभाग हैं, जो निम्नवत है–
(१.) स्थलमंडल
(२.) जलमंडल
(३.) वायुमंडल


(१.) स्थलमंडल –

पृथ्वी का वह ऊपरी ठोस भाग जिसमें मिट्टी, कंकड़, पत्थर, पठार इत्यादि सम्मिलित हैं, स्थलमंडल कहलाता है।
  • जीवधारियों के पोषण के लिए भोजन की पूर्ति स्थलमंडल से ही संभव हो पाते हैं।
  • मनुष्य एवं अधिकांशतः जीवधारी प्राणी स्थलमंडल पर निवास करते हैं।
  • पेड़–पौधे भी अपना पोषण मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व से करते हैं जो मिट्टी स्थलमंडल के अंतर्गत आती है।
  • पृथ्वी के संपूर्ण भाग का 29% भाग  स्थलमंडल का हिस्सा है।
  • अन्य बहुत सारी क्रियाकलापें स्थलमंडल पर होते हैं।

(२.) जलमंडल –

पृथ्वी का वह ऊपरी हिस्सा जहां जल की मौजूदगी होती है साथ–हीं जल के विभिन्न भाग अथवा स्रोत जैसे–नदी, झील, सागर, तालाब,महासागर आदि के सम्मिलित रूप को जलमंडल कहे जाते हैं।
  • समग्र जीवधारी प्राणियों के लिए जल महत्वपूर्ण है जो कि जलमंडल से उपलब्ध हो पाता है।
  • तालाब, नदी, सागर, महासागर, झील आदि ये सब पृथ्वी पर जल के विभिन्न भाग हैं।
  • पृथ्वी के 71% प्रतिशत भू–भाग पर जलमंडल का विस्तार है अर्थात तालाब, नदी, सागर, महासागर, झील, जलाशय ये सभी पृथ्वी के 71% भूभाग को घेरे हुए हैं।
  • कुछ ऐसे जीवधारी हैं जो जलमंडल में निवास करते हैं। जैसे– मछली, घड़ियाल, समुद्री घोड़ा, सोंस, जलीय पौधे आदि।

(३.) वायुमंडल –

स्थलमंडल और जल मंडल के चारों ओर कई सौ किलोमीटर की ऊंचाई तक हवा का एक परत है जिसे वायुमंडल कहा जाता है।
  • समस्त जीवधारी प्राणी के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक देन वायु है जो वायुमंडल में विद्यमान हैं।
  • पृथ्वी के चारों तरफ वायु का फैलाव है एवं पृथ्वी पर जितने भी खाली स्थान हैं वहां हवा की मौजूदगी होती है।
  • पृथ्वी की गति के साथ-साथ वायु भी घूमती है।
  • वायुमंडल में कई आवश्यक गैसें भी मौजूद होते हैं। जैसे– नाइट्रोजन (78%), ऑक्सीजन (21%), कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%) अन्य गैस (0.97%) .
  • वायु धूलकण, जलवाष्प एवं गैसों का मिश्रण है।
  • वायुमंडल में सबसे अधिक नाइट्रोजन गैस मौजूदा है जो कि 78% है सबसे कम हाइड्रोजन गैस है जो कि 0.0005% है।
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वायुमंडल की परतें :

वायुमंडल में विभिन्न प्रकार की परतें पाई जाती है जो एक दूसरे से अलग–अलग ऊंचाई पर है. इन परतों की संख्या 5 है, जो निम्नवत है–
(i) क्षोभमंडल
(ii) समतापमंडल
(iii) मध्यमंडल
(iv) आयन मंडल
(v) बहिर्मंडल


(i) क्षोभमंडल –

वायुमंडल की सबसे निचली परत को क्षोभमंडल  कहते हैं।
  • पृथ्वी सतह से सबसे निकट का वायुमंडलीय परत क्षोभमंडल  है।
  • पृथ्वी की सतह भूमध्य रेखा से क्षोभमंडल  की ऊंचाई लगभग 18 किलोमीटर है जबकि ध्रुव पर से 8 किलोमीटर है।
  • पृथ्वी सतह से न्यूनतम ऊंचाई के आधार पर क्षोभमंडल  प्रथम स्थान पर है अर्थात पृथ्वी सतह से सबसे निकट का वायुमंडलीय परत क्षोभमंडल  है।
  • क्षोभमंडल  में ही बादल का निर्माण होता है जिससे बारिश व मेघगर्जन होती है एवं आंधी जैसी वायुमंडलीय परिघटना इसी क्षोभमंडल  में होती है।
  • पृथ्वी पर जितने भी बड़े–से–बड़े पहाड़,पठार हैं उनकी ऊंचाई क्षोभमंडल  तक ही सीमित है.
  • क्षोभमंडल  और समताप मंडल के बीच एक रेखा होती है जो क्षोभमंडल  और समताप मंडल को अलग करती है, उस रेखा को जो क्षोभसीमा कहते हैं।

(ii.) समताप मंडल –

क्षोभमंडल  की ऊपरी सतह पर अवस्थित वायुमंडलीय परत को समताप मंडल कहते हैं।
  • सूर्य से निकलने वाली पराबैगनी किरण को ओजोन परत रोक देती है ताकि पराबैगनी किरण पृथ्वी सतह पर ना पहुंच सके। यह ओजोन परत/ओजोन मंडल समताप मंडल में हीं पाया जाता है।
  • वायुयान (जहाज) समताप मंडल में उड़ते हैं।
  • समताप मंडल की ऊंचाई विषुवत रेखा पर 18 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर तक पाई जाती है।
  • पृथ्वी सतह की ऊंचाई से दूसरा सबसे निकट का वायुमंडलीय परत समताप मंडल है।

(iii.) मध्य मंडल –

समताप मंडल के ऊपरी सतह पर अवस्थित वायुमंडलीय परत को मध्य मंडल कहते हैं।
  • पांचों मंडलों के सबसे बीच में पाए जाने के कारण इस वायुमंडलीय परत को मध्य मंडल कहते हैं।
  • मध्य मंडल समताप मंडल के ठीक ऊपर लगभग 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई होती है।
  • पृथ्वी सतह की ऊंचाई से तीसरा सबसे निकट का वायुमंडलीय परत मध्य मंडल है।
  • मध्य मंडल में ही उल्कापिंड का जलना शुरू होता है।
  • मध्य मंडल और आयन मंडल को अलग करने वाली सीमा को मध्य सीमा कहते हैं।

(iv) आयन मंडल –

मध्य मंडल के ठीक ऊपर पाए जाने वाले वायुमंडलीय परत को आयन मंडल कहते हैं।
  • आयन मंडल को उष्ण मंडल भी कहते हैं।
  • यह मध्य मंडल के ऊपर लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है।
  • आयन मंडल के कारण ही पृथ्वी पर टीवी, रेडियो, मोबाइल, रडार, टेलीफोन आदि संचार व्यवस्था का लाभ उठा पाते हैं। क्योंकि इसी मंडल में संचार व्यवस्था से जुड़े संचार उपग्रह को स्थापित किया जाता है।
  • पृथ्वी सतह की ऊंचाई से चौथा सबसे निकट का वायुमंडलीय परत आयन मंडल है।

(v) बाह्य मंडल/बहिर्मंडल –

आयन मंडल के ऊपर पाए जाने वाले अंतिम वायुमंडलीय परत को बाह्य मंडल/बहिर्मंडल  कहते हैं।
  • पृथ्वी की सतह से सबसे ऊंचाई पर अवस्थित अंतिम वायुमंडलीय परत बाह्य मंडल/बहिर्मंडल है।
  • वायुमंडल में ही कृत्रिम उपग्रह को स्थापित किया जाता है।
  • वायुमंडल के ऊपर कोई वायुमंडलीय परत नहीं है क्योंकि सबसे ऊपर का और अंतिम परत बाह्य मंडल हीं है।
  • वायुमंडल की कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं है।
पृथ्वी के परिमंडल,वायुमंडल की संरचना image, वायुमंडलीय परत की संरचना image

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जैवमंडलीय जीव–जगत


(१.) स्थलमंडल में रहने वाले जीव – थलचर
(२.) जलमंडल में रहने वाले जीव – जलचर
(३.) वायुमंडल में रहने वाले जीव – नभचर

थलचर –

स्थलीय भूभाग पर रहने वाले या विचरण करने वाले जीवधारी प्राणी को थलचर कहते हैं।
जैसे– मनुष्य, शेर, चीता, गाय, कुत्ता आदि।

जलचर –

जलीय भूभाग में रहने वाले अथवा विचरण करने वाले जीवधारी प्राणी को जलचर कहते हैं।
उदाहरण– मछली, सोंस, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ आदि।
  • जलीय जीव पानी में घुले हुए ऑक्सीजन से सांस लेते हैं।

जलीय पौधा पानी में पाए जाने वाले पौधे को जलीय पौधे कहे जाते हैं।

  • कुछ जलीय पौधे पूर्णतः पानी में ही होते हैं।
  • कुछ जलीय पौधे आधा पानी सतह के नीचे एवं आधा पानी सतह के ऊपर होते हैं।
  • जलीय पौधे पानी में खुली हुई मिट्टी के पोषक तत्व से अपना पोषण करते हैं।
  • कुछ जलीय पौधों के नाम– कमल, लकी बंबू (lucky bamboo), सिंघाड़ा, हॉर्सटेल वाटर प्लांट (horsetail water plant), स्पाइडर प्लांट (spider plant), वाटर लिली , मोजैक प्लांट (mosaic plant), मनी प्लांट(money plant), कार्डिनल फ्लावर (cardinal flower), water luttuce आदि।

नभचर –

आकाश में विचरण करने वाले अथवा हवा में उड़ने वाले पक्षी या कीट पतंगों को नभचर कहा जाता है।
जैसे– कौवा, मैना, उल्लू, चमगादड़, मच्छर, मक्खी आदि।

महासागर –

पृथ्वी पर चार बड़े जलभाग हैं जिसे महासागर कहते हैं  यथार्थ में महासागर की संख्या 4 है जो निम्नवत है
  1. प्रशांत महासागर
  2. हिंद महासागर
  3. अटलांटिक महासागर
  4. आर्कटिक महासागर
महाद्वीप –
पृथ्वी पर स्थलमंडल के अंतर्गत सात बड़े–बड़े स्थल के ठोस हिस्से हैं, जिसे महाद्वीप कहा जाता है। ये सातों महाद्वीप 29% भूभाग के हिस्से को छेंका हुआ है।
          पृथ्वी पर कुल सात महाद्वीप हैं, जो निम्नवत है–
  1. एशिया महाद्वीप
  2. अफ्रीका महाद्वीप
  3. उत्तरी अमेरिका महाद्वीप
  4. यूरोप महाद्वीप
  5. अंटार्कटिका महाद्वीप
  6. दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप
  7. ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप।
पृथ्वी के परिमंडल,विश्व महाद्वीप एवं महासागर image


स्थल संधि/स्थलडमरूमध्य :–

स्थल का वह संकरा भाग जो दो बड़े स्थल खंडों को आपस में एक–दूसरे से जोड़ता है, उसे स्थल संधि/स्थलडमरूमध्य कहते हैं।
पृथ्वी के परिमंडल,स्थल संधि के उदाहरण image, स्थलडमरूमध्य image


जलसंधि जलडमरूमध्य :–

पानी का वह संकरा भाग जो दो बड़े जल राशियों (जैसे–समुद्र, महासागर) को आपस में एक–दूसरे से जोड़ते हों, उसे जलसंधि जलडमरूमध्य कहते हैं।
पृथ्वी के परिमंडल,जल संधि के उदाहरण image, जलडमरूमध्य image

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