1/06/22

कक्षा6 NCERT भूगोल "2.पृथ्वी एवं उसकी गति" संपूर्ण नोट्स

2. पृथ्वी एवं उसकी गति

सौरमंडल में सूर्य के चारों तरफ विभिन्न ग्रह चक्कर लगाते हैं उनमें से एक पृथ्वी ग्रह भी है। पृथ्वी ग्रह की गति सूर्य के चारों तरफ किस तरह की होती है? इस प्रकार पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने में पृथ्वी ग्रह पर कौन–कौन सी गतिविधियां होती है? इन तमाम मुद्दों पर विश्लेषण इस लेख में किया गया है। कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें।


पृथ्वी की गति

सौरमंडल में पृथ्वी गति करती है। सौरमंडल में पृथ्वी की दो गति है, जो निम्नवत है–
(i) घूर्णन गति या दैनिक गति
(ii) परिभ्रमण गति

(i) घूर्णन गति –

पृथ्वी ग्रह अपने अक्ष पर घूम कर चक्कर लगाती है, जिसे घूर्णन गति कहा जाता है।
                               जिस प्रकार एक लट्टू अपने कील पर घूमती है ठीक उसी प्रकार पृथ्वी भी अपने अक्ष पर घूमती है जिसे घूर्णन गति कहा जाता है।
  • पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमने के क्रम में अर्थात पृथ्वी का घूर्णन गति के क्रम में सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के जिस भाग पर पड़ता है पृथ्वी के उस भाग पर सूर्य–प्रकाश के कारण दिन हो जाता है। ठीक इसके विपरीत सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के जिस भाग पर नहीं पड़ता है वह भाग अंधकार में रहता है अर्थात वहां रात हो जाती है। अतः पृथ्वी पर रात दिन होने का कारण पृथ्वी का घूर्णन गति है इसीलिए घूर्णन गति को दैनिक गति भी कहा जाता है।
  • पृथ्वी 24 घंटे में अपने अक्ष पर घूमकर एक चक्कर पूरा करती है। अतः पृथ्वी का घूर्णन गति 24 घंटा है, इसलिए पृथ्वी पर दिन और रात 24 घंटे का होता है।

ग्लोब–

पृथ्वी ग्रह के जैसा ही पृथ्वी का नमूना बनाया गया है जिसे ग्लोब कहते हैं।
                    जिस प्रकार से पृथ्वी ग्रह की आकृति है एवं जलीय भूभाग, स्थलीय भूभाग, मैदान, पठार, महासागर, महाद्वीप, महादेश, देश, देश की सीमा, इत्यादि पृथ्वी ग्रह पर है ठीक इसी प्रकार ग्लोब की संरचना होती है। चूंकि पृथ्वी ग्रह की अपेक्षाकृत ग्लोब काफी छोटा है लेकिन पृथ्वी ग्रह पर की समग्र जानकारी ग्लोब पर मिलती है।
  • जिस प्रकार से पृथ्वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है ठीक उसी प्रकार ग्लोब भी 231/2° झुकी हुई है।
ग्लोब का अपने अक्ष पर झुकाव

ग्लोब का अपने अक्ष पर झुकाव

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अक्ष–
पृथ्वी के दो ध्रुव हैं– उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव।
उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को अक्ष कहते हैं।
  • पृथ्वी पर दिन–रात होने का कारण पृथ्वी का घूर्णन गति है।
  • पृथ्वी का घूर्णन गति 24 घंटे का होता है।
  • पृथ्वी का नमूना जब है, जो आकार में पृथ्वी की अपेक्षाकृत काफी छोटा है लेकिन पृथ्वी के सदृश है।
  • पृथ्वी की समग्र स्थलीय एवं जलीय भूभाग की स्थिति ग्लोब पर सन्निहित होती है अथवा देखने को मिलती है।
  • पृथ्वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है।

(ii) परिभ्रमण गति–

घूर्णन गति करते हुए पृथ्वी 365 दिन में सूर्य के चारों तरफ घूमकर एक चक्कर लगा लेती है, पृथ्वी की इस वार्षिक गति को परिभ्रमण गति कहते हैं।

आभासी गति–

पृथ्वी पर से देखने पर ऐसा लगता है कि सूर्य गति कर रहा है। वास्तव में ऐसा नहीं होता है बल्कि सूर्य स्थिर है और हमारी पृथ्वी घूम रही है।
                   पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है जिस कारण सूर्य पूरब से पश्चिम की ओर आता हुआ आभास या प्रतीत होता है। सूर्य की इस गति को आभासी गति कहते हैं।
उदाहरणार्थ– चलती हुई वाहन (जैसे– ट्रेन, बस, कार आदि) से बाहर की तरफ देखने पर ऐसा लगता है कि पेड़–पौधे या बाहर की वस्तुएं पीछे की तरफ जा रही है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता बल्कि हम वाहन के साथ–साथ चल रहे होते हैं, जिससे बाहर की वस्तुएं पीछे की तरफ जाती हुई नजर आती है। पेड़–पौधे या बाहर की वस्तुएं जो पीछे की तरफ गति करती हुई नजर आती है, इसी गति को आभासी गति कहा जाता है।

पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा–

जब पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ घूमती है तो एक बार पृथ्वी का झुकाव सूर्य के ओर होता है एवं आधी परिक्रमा करने के बाद पृथ्वी का तीसरी बार झुकाव सूर्य के विपरीत होता है। दूसरी और चौथी स्थिति में पृथ्वी का झुकाव न तो सूर्य के तरफ होता है और न ही सूर्य के विपरीत होता है।
                      पृथ्वी द्वारा सूर्य के चारों तरफ परिक्रमा की स्थिति को इस चित्र के द्वारा समझा जा सकता है–
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा,सूर्य का परिक्रमा करने में पृथ्वी की स्थिति

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गोलार्द्घ–
जब किसी गोले को दो बराबर हिस्सों में काटकर विभक्त कर दिया जाय तो कटा हुआ प्रत्येक हिस्सा उस गोले का गोलार्द्घ कहलाता है।
पृथ्वी के दो गोलार्द्घ हैं– उत्तरी गोलार्द्घ और दक्षिणी गोलार्द्घ।

पृथ्वी(ग्लोब) के बीचों–बीच एक काल्पनिक रेखा खींची गई है जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में काल्पनिक रूप से बांटती है, जिसे भूमध्य रेखा या विषुवत् रेखा भी कहते हैं।
                          पृथ्वी के बीचों–बीच खींची गई इस काल्पनिक रेखा अर्थात भूमध्य रेखा के ऊपरी आधे हिस्से को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्घ कहते हैं। जबकि भूमध्य रेखा के नीचे आधे हिस्से को पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्द्घ कहते हैं।
उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणी गोलार्द्ध



कर्क रेखा– पृथ्वी (ग्लोब) पर भूमध्य रेखा से ऊपर पूरब से पश्चिम की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा को कर्क रेखा कहा जाता है। कर्क रेखा उत्तरी गोलार्द्घ में होती है।

मकर रेखा– पृथ्वी पर भूमध्य रेखा से नीचे पूरब से पश्चिम की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा को मकर रेखा कहते हैं। मकर रेखा दक्षिणी गोलार्द्घ में होती है।
पृथ्वी पर के कटिबंध,कर्क रेखा,मकर रेखा,विषुवत रेखा/भूमध्य रेखा

पृथ्वी पर के कटिबंध,कर्क रेखा,मकर रेखा,विषुवत रेखा/भूमध्य रेखा


ध्रुव पर 6 महीने रात 6 महीने दिन–

ध्रुव में लगातार छः महीने का रात एवं छः महीने का दिन होता है। इसका कारण है कि उत्तरी ध्रुव पर सूर्य का प्रकाश लगातार 6 महीने तक पड़ता है, जिससे वह स्थान प्रकाशमय हो जाता है और लगातार छः महीने तक दिन की स्थिति बनी रहती है। उसी समय दक्षिणी ध्रुव में अंधेरा होता है। क्योंकि दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव के विपरीत दिशा में होता है, जिस कारण दक्षिणी ध्रुव पर छः महीने तक प्रकाश नहीं पहुँच पाता है और वह स्थान अंधकारमय हो जाता है, इसलिए दक्षिणी ध्रुव पर छः महीने की रात होती है। अतः उत्तरी ध्रुव पर लगातार छः महीने तक दिन रहता है एवं उसी समय दक्षिणी ध्रुव पर लगातार छः महीने तक रात रहती है।

पृथ्वी पर जून एवं दिसम्बर माह की स्थिति–

21 जून को पृथ्वी सूर्य के तरफ झुकी हुई होती है। इस समय सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती है फलस्वरुप दिन की अवधि लंबी हो जाती है और तापमान बढ़ जाता है, जिस कारण इस समय उत्तरी गोलार्द्घ में गर्मी का समय होता है। हमारा देश भारत उत्तरी गोलार्द्घ में है इसलिए जून के महीने में यहां खूब गर्मी पड़ती है। इसी समय दक्षिणी गोलार्द्घ में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है इसलिए जून के महीने में दक्षिणी गोलार्द्घ पर तापमान घट जाता है, फलतः वहाँ जाड़े का मौसम होता है।
                               21 जून के छः महीने बाद अर्थात् 22 दिसम्बर को पृथ्वी सूर्य की आधी परिक्रमा कर सूर्य के दूसरी ओर पहुँच जाती है। इस समय पृथ्वी का झुकाव सूर्य के विपरीत होता है और पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्द्घ सूर्य के सामने होता है फलस्वरूप दक्षिणी गोलार्द्घ में स्थित मकर रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ने लगती है। इस समय दक्षिणी गोलार्द्घ पर अधिकांश भाग प्रकाशमय होता है एवं अतिअल्प हिस्सा अंधेरे में रहता है। इसलिए इस समय दक्षिणी गोलार्द्घ में दिन लंबी और रात छोटी होती है। साथ हीं दक्षिणी गोलार्द्घ पर तापमान बढ़ जाती है जिससे यहां गर्मी की ऋतु होती है। इसके विपरीत इसी समय उत्तरी गोलार्द्घ पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है, जिससे दिन छोटा होता है और यहां दिसम्बर महीने में जाड़े की ऋतु होती है।
  • 21 जून को सूर्य सीधा कर्क रेखा पर पड़ता है जिस कारण वहां दिन लंबी और रात छोटी होती है एवं उसके आसपास के क्षेत्र में इस समय गर्मी की ऋतु होती है।
पृथ्वी पर के कटिबंध,उत्तरी ध्रुव,दक्षिणी ध्रुव



पृथ्वी पर सितंबर और मार्च महीने की स्थिति–

21 मार्च और इसके 6 महीने बाद अर्थात 23 सितंबर की स्थिति। इन दिनों पृथ्वी का झुकाव न तो सूर्य के तरफ होता है और न ही सूर्य के विपरीत दिशा में होता है। इस दिन सूर्य का प्रकाश सभी अक्षांश रेखाओं को दो बराबर भागों में काटता है, इसलिए इन दिनों दिन और रात की अवधि बराबर होती है। 21 मार्च और 23 सितंबर की ये तिथियाँ समदिवारात्रि कही जाती है।
                            21 मार्च और 23 सितंबर इन दो महीनों में विषुवत रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है, जिस कारण यहां इन दोनों महीनों में अधिक गर्मी पड़ती है। लेकिन उत्तरी गोलार्द्घ एवं दक्षिणी गोलार्द्घ में न तो अधिक गर्मी पड़ती है और न ही अधिक ठंडी। 21 मार्च महीने में हमारे देश में वसंत ऋतु एवं 23 सितंबर महीने में शिशिर ऋतु होती है।

सुबह के समय जब सूर्य उदय होता है तब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर तिरछी पड़ती है, जिस कारण धूप हल्की होती है। फलतः गर्मी तेज नहीं होती और सुबह के समय परछाई भी लंबी बनती है। जैसे–जैसे दोपहर होता जाता है वैसे–वैसे सूर्य की किरणें भी पृथ्वी पर लंबवत् होती जाती है और इसी के अनुपात में परछाई भी छोटी होती चली जाती है। जब सूर्य दोपहर में पूर्णतः हमारे लंबवत् हो जाते हैं तो उस समय गर्मी भी काफी लगती है और हमारी परछाई बिलकुल छोटी हो जाती है।
                    शाम होते–होते सूर्य की किरणें तिरछी पड़ने लगती है और गर्मी का अनुभव भी कम होने लगता है। सूर्य के ढल जाने पर पृथ्वी पर बिल्कुल प्रकाश नहीं होता जिस कारण रात के समय ठंडक का अनुभव होने लगता है।

हमारी पृथ्वी की आकृति गोलाकार होने के कारण यहां सभी भागों पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं पड़ेंगी। पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है। घूमने के क्रम में पृथ्वी का वो हिस्सा जो सूर्य के ठीक सामने आती है वहां सूर्य की किरणें लंबवत पड़ती है और अन्य भागों पर तिरछी पड़ती है।

कटिबंध–

पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्घ को सूर्य के पड़ने वाली किरणों के आधार पर काल्पनिक रूप से विभक्त किए गए हैं जिसे कटिबंध कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में–

तापमान के आधार पर उत्तरी गोलार्द्घ और दक्षिणी गोलार्द्घ के क्षेत्रों को काल्पनिक रूप से रेखांकित कर विभक्त किया गया है जिसे कटिबंध कहते हैं।
पृथ्वी पर कटिबंधों की संख्या 3 है,जो निम्नवत है–
(१.) ऊष्ण कटिबध
(२.) समशितोष्ण कटिबंध
(३.) शीत कटिबंध

(१.) ऊष्ण कटिबंध–

पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूर्य की किरणें लगभग हमेशा सीधी पड़ती है उसे ऊष्ण कटिबंध कहते हैं।
  • उष्ण कटिबंध पर सालों भर गर्मी पड़ती है क्योंकि इस क्षेत्र में हमेशा सूर्य का प्रकाश पड़ता रहता है
  • उष्ण कटिबंध पृथ्वी के बीचोंबीच होता है इसलिए यहां हमेशा प्रकाश पड़ता रहता है
  • यदि पृथ्वी को काल्पनिक रूप से दो समान हिस्से में विभक्त करें तो बीच की हिस्से में सूर्य की किरणें हमेशा सीधी पड़ेगी। इसी बीच वाले क्षेत्र को ऊष्ण कटिबंध/ऊष्ण कटिबंध की पेटी कहते हैं।

(२.) समशितोष्ण कटिबंध–

पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है, उसे समशीतोष्ण कटिबंध कहते हैं।
  • समशीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की अपेक्षा कम गर्मी पड़ती है। क्योंकि इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है जिस कारण ताप घट जाता है।
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से जैसे-जैसे उत्तर या दक्षिण की तरफ बढ़ते हैं वैसे–वैसे पृथ्वी के गोलाकार सतह के कारण सूर्य की किरणें भी तिरछी पड़ने लगती है और यह किरणें बड़े हिस्से में फैल जाती है। किरणें का बड़े हिस्से में फैलाव हो जाने के कारण ताप घट जाता है और उस क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की अपेक्षा कम गर्मी मिलने लगती है इस कम गर्मी वाले क्षेत्र का नाम समशीतोष्ण कटिबंध/समशीतोष्ण कटिबंध की पेटी है।

(३.) शीत कटिबंध–

पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूर्य की किरणें अत्यधिक तिरछी पड़ती है, उसे शीत कटिबंध कहा जाता है।
  • समशीतोष्ण कटिबंध की अपेक्षा शीत कटिबंध पर सूर्य की किरणें काफी तिरछी पड़ती है जिस कारण इस क्षेत्र को तापमान बहुत कम मिलता है अर्थात नहीं के बराबर मिलता है। तापमान नहीं मिल पाने के कारण इस क्षेत्र का वातावरण एवं धरातल गर्म नहीं हो पाती फलतः शीत कटिबंधीय क्षेत्र में सालों भर बर्फ जमी रहती है।
पृथ्वी पर के कटिबंध,विषुवत वृत्त,मकर वृत्त,कर्क वृत्त


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महत्वपूर्ण बिंदुसार–

  1. पृथ्वी की दो गति है– घूर्णन गति और परिभ्रमण गति.
  2. पृथ्वी के घूर्णन गति का समय 24 घंटे का होता है जबकि परिभ्रमण गति का समय 365 दिन का होता है.
  3. पृथ्वी पर दो ध्रुव है– उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव।
  4. पृथ्वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है
  5. पृथ्वी के दो गोलार्द्घ है– उत्तरी गोलार्द्घ और दक्षिणी गोलार्द्घ।
  6. पृथ्वी के ध्रुव पर लगातार छह महीने का रात एवं 6 महीने का दिन होता है।
  7. 21 जून को पृथ्वी पर सबसे लंबी दिन होती है।
  8. पृथ्वी के घूर्णन गति के कारण दिन और रात होते हैं जबकि परिभ्रमण गति के कारण मौसम एवं ऋतु में परिवर्तन होते हैं।
  9. 22 दिसंबर को दक्षिणी गोलार्ध में दिन लंबी और रातें छोटी होती है।
  10. पृथ्वी की गोलाकार आकृति के कारण इस के सभी हिस्सों पर सूर्य की किरणें समान रूप से नहीं पड़ेगी।
  11. पृथ्वी पर तीन कटिबंध हैं– ऊष्म कटिबंध, समशीतोष्ण कटिबंध एवं शीत कटिबंध।
  12. ऊष्ण कटिबंध पर सालों भर गर्मी पड़ती है.
  13. समशीतोष्ण कटिबंध पर न ही ज्यादा गर्मी और न ही ज्यादा ठंडी पड़ती है अर्थात इस क्षेत्र में तापमान मध्यम वर्ग में होता है.
  14. शीत कटिबंध में सालों भर बर्फ जमी रहती है।

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