12/31/21

कक्षा–6 भूगोल NCERT "हमारा सौरमंडल" संपूर्ण प्रश्न–उत्तर

 1.  सही विकल्प को चुनें–

(i) राशियों की कुल संख्या कितनी है?
(क) 5                     (ख) 12
(ग) 8                      (घ) 27

(ii) सूर्य की आकृति कैसी है?
(क) गोल                  (ख) चिपटी
(ग) वर्गाकार            (घ) आयताकार

(iii) सौर परिवार का मुखिया कौन है?
(क) पृथ्वी                 (ख) चंद्रमा
(ग) सूर्य                    (घ) नक्षत्र

(iv) ग्रहों की कुल संख्या कितनी है?
(क) 8                      (ख) 9
(ग) 12                     (घ) 27

(v) सप्तर्षि कितने तारों का समूह है?
(क) 27                    (ख) 8
(ग) 12                     (घ) 7

नोट:– उपर्युक्त प्रश्नों के विकल्प में हरे रंग से रंगे हुए विकल्प प्रश्नों के उत्तर हैं।

2. खाली जगहों को भरिए–
(i) पृथ्वी एक नक्षत्र को ........ दिनों में पार करती है।
(ii) विषुवत रेखा पर ध्रुवतारा ....... पर दिखाई पड़ता है।
(iii) मंगल और ....... ग्रह के बीच क्षुद्रग्रह पाए जाते हैं।
(iv) वृहस्पति के ....... उपग्रह हैं।
(v) सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक ....... में पहुंचता है।
उत्तर: (i) 14, (ii) क्षितिज, (iii) वृहस्पति, (iv) 79, (v) 8 मिनट

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3. निम्न प्रश्नों के उत्तर दें–

(i) सूर्य से दूरी के अनुसार विभिन्न ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर : सूर्य से दूरी के अनुसार विभिन्न ग्रहों के नाम निम्नवत् हैं–
नेपच्यून (वरुण), यूरेनस (अरुण), शनि, बृहस्पति, मंगल, पृथ्वी, शुक्र और बुध।

(ii) सूर्य से सबसे नजदीकी ग्रह का क्या नाम है?
उत्तर: सूर्य से सबसे नजदीकी ग्रह का नाम बुध ग्रह है।

(iii) सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन–सा है?
उत्तर: सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति ग्रह है।

(iv) पृथ्वी के निकटवर्ती ग्रह कौन-कौन से हैं?
उत्तर: पृथ्वी के निकटवर्ती ग्रह शुक्र और मंगल हैं।

(v) उस ग्रह का क्या नाम है जिसके चारों और छल्ले पाए जाते हैं?
उत्तर:शनि ग्रह एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसके चारों और छल्ले पाए जाते हैं।

(vi) सौरमंडल का कौन सा ग्रह आपको सबसे अलग लगा और क्यों?
उत्तर: सौरमंडल का शुक्र ग्रह और अरुण ग्रह सबसे अलग लगा। क्योंकि ये दो ग्रह ऐसे ग्रह हैं जो अन्य ग्रह की अपेक्षा विपरीत दिशा में सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं।

(vii) पृथ्वी के उपग्रह का क्या नाम है?
उत्तर: पृथ्वी के उपग्रह का नाम चंद्रमा है।

(viii) वे कौन–कौन से ग्रह हैं जो पृथ्वी के घूमने की विपरीत दिशा में घूमते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के घूमने की विपरीत दिशा में घूमने वाले दो ग्रह हैं जिनका नाम है– शुक्र ग्रह और अरुण ग्रह

(ix) आकाशगंगा क्या है?
उत्तर: आकाश में दूर-दूर तक रास्ते की तरह असंख्य तारों की चौड़ी गुच्छे फैली हुई होती है जो सफेद चमकदार पट्टी की तरह दिखती है जिसे आकाशगंगा कहते हैं।

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4. आकाशीय पिंड एवं दी गई विशेषताओं का सही मिलान कीजिए–
उत्तर: आकाशीय पिंड एवं दी गई विशेषताओं का सही मिलान  निम्नवत् है–
(i) बुध– (ग) सबसे छोटा ग्रह।
(ii) पृथ्वी– (घ) नीला ग्रह।
(iii) चंद्रमा– (ख) पृथ्वी का उपग्रह।
(iv) उल्कापिंड–(ङ) आकाश में चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे टुकड़े।
(v) आकाशगंगा– (च) लाखों तारों का समूह।
(vi) ब्रह्मांड– (क) लाखों आकाशगंगा का समूह।

5. आपस में चर्चा कीजिए और लिखिए–
(i) कई तारे सूर्य से बड़े हैं फिर भी छोटे क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर: सौरमंडल में कई तारे सूर्य से बड़े हैं फिर भी बहुत छोटे दिखाई पड़ते हैं क्योंकि पृथ्वी से कई तारे अरबों खरबों किलोमीटर दूर स्थित है। पृथ्वी से इतनी दूर स्थित होने के कारण ये तारे पृथ्वी पर से बहुत छोटे दिखाई देते हैं जबकि पृथ्वी के सबसे निकट का तारा सूर्य है इसलिए सूर्य अन्य तारों की अपेक्षा पृथ्वी पर से बड़े दिखते हैं।

(ii) तारे आकाश में ही हैं फिर भी दिन में क्यों नहीं दिखाई देते?
उत्तर: सौरमंडल में तारे सदैव टिमटिमाते रहते हैं फिर भी यह दिन में पृथ्वी पर से दिखाई नहीं देता है। इसका कारण यह है कि अन्य तारे की अपेक्षा सूर्य का प्रकाश बहुत तीव्र है परिणामस्वरूप सूर्य का तीव्र प्रकाश टिमटिमाते हुए तारे के प्रकाश को ढंक देता है, जिस कारण पृथ्वी पर से दिन में सूर्य का तीव्र प्रकाश दिखलाई पड़ता है और इस प्रकाश के प्रभाव से तारे नज़र नहीं आते हैं।

(iii) चंद्रमा तारों से छोटा है फिर भी हमें बड़ा दिखाई क्यों देता है?
उत्तर: चंद्रमा का अपेक्षाकृत तारे आकार में बड़े हैं लेकिन यह पृथ्वी से बहुत दूर स्थित है जिस कारण तारे चंद्रमा से बड़े होने के बावजूद भी पृथ्वी पर से छोटा दिखाई पड़ता है। विलोमतः चंद्रमा का आकार तारे के आकार से छोटा होने के कारण भी यह पृथ्वी पर से बड़ा दिखाई देता है  क्योंकि चंद्रमा तारे की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत नजदीक स्थित है।

(iv) अगर किसी आकाशीय पिंड में प्रकाश न हो तो वह हमें नजर आएगा? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर: यदि किसी आकाशीय पिंड में प्रकाश न हो तो वह आकाशीय पिंड हमें नजर नहीं आयेगा। क्योंकि जब तक उस आकाशीय पिंड का प्रकाश हमारे आखों तक नहीं पहुंचता है तब तक हम उस आकाशीय पिंड को नहीं देख सकते हैं। अतः किसी आकाशीय पिंड में प्रकाश नहीं होने के कारण वह आकाशीय पिंड हमें नजर नहीं आयेगा।

6. इनमें किन–किन आकाशीय पिंडों के नाम छुपे हैं–
Class6 hamara sourmandal questions answer geography


उत्तर: उपर्युक्त सारणी में छिपे हुए आकाशीय पिंड के नाम–
सूर्य, बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, वृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
कृपया आप उपर्युक्त सारणी में और भी आकाशीय पिंडों के नाम को ढूंढने का प्रयास करें ।


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12/29/21

हमारा सौरमंडल| कक्षा–6 NCERT भूगोल

 सौरमंडल :–

ब्रह्मांड में सूर्य सहित सूर्य के चारों तरफ घूमने वाले सारे खगोलीय पिंड जैसे– "ग्रह,नक्षत्र,उपग्रह,उल्का पिंड, क्षुद्र ग्रह", तारामंडल,आकाशगंगा आदि के सम्मिलित रूप को सौरमंडल कहते हैं। सौरमंडल का मुखिया सूर्य होता है।

सौर प्रज्ज्वाल –
सूर्य की सतह पर धधकती हुई आग की लपटें दिखाई देती है। सूर्य की सतह पर यह धधक उठती रहती है इस आग की धधक के अनुपात में बहुत तेज चमक भी उत्पन्न होती है, जिसे सौर प्रज्ज्वाल कहते हैं।

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ग्रह :–

सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंड को ग्रह कहते हैं।
  • ग्रह में स्वयं का प्रकाश नहीं होता बल्कि यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है।
  • सौरमंडल में ग्रहों की कुल संख्या आठ है, जो इस प्रकार से है– बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।
  • सभी ग्रहों का मुखिया सूर्य होता है। यथार्थ में सौरमंडल का मुखिया सूर्य होता है।
  • ग्रह की दो गति होती है– एक अपने अक्ष पर की गति एवं दूसरी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने की गति।
  • ग्रह का अपने अक्ष पर की गति को परिभ्रमण गति कहते हैं।
  • ग्रह का सूर्य के चारों तरफ की गति को परिक्रमण गति कहते हैं।
Hamara saurmandal image class6 ncert geography


(१.) बुध ग्रह –
  1. सूर्य के सबसे निकट का ग्रह– बुध ग्रह है।
  2. आकार में सभी ग्रहों से छोटा– बुध ग्रह है।
  3. बुध ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 58.6 दिन में पूरा करता है।
  4. सूर्य के चारों तरफ परिक्रमा को पूर्ण करने में बुध ग्रह को 87.97 दिन का समय लगता है।
  5. बुध ग्रह का एक भी उपग्रह नहीं है।
(२.) शुक्र ग्रह–
  1. सूर्य के दूसरा सबसे निकट का ग्रह शुक्र ग्रह है।
  2. आकार के आधार पर छठा सबसे बड़ा ग्रह शुक्र ग्रह है।
  3. शुक्र ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 243 दिन में पूरा करता है एवं परिक्रमण गति को 224.7 दिन में पूरा करता है।
  4. शुक्र ग्रह का एक भी उपग्रह नहीं है।
  5. सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह शुक्र ग्रह है।
  6. सर्वाधिक चमकीला ग्रह शुक्र ग्रह है।
  7. शुक्र को चमकीला ग्रह, सांझ का तारा या भोर का तारा भी कहा जाता है।
  8. पृथ्वी के सबसे निकट का ग्रह शुक्र ग्रह है।
(३.) पृथ्वी ग्रह –
  1. सूर्य के सबसे निकट का तीसरा ग्रह– पृथ्वी ग्रह है।
  2. आकार के आधार पर पांचवा सबसे बड़ा ग्रह पृथ्वी ग्रह है।
  3. पृथ्वी एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है।
  4. पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा है।
  5. पृथ्वी को नीला ग्रह भी कहते हैं क्योंकि जल की उपस्थिति के कारण यह नीले रंग का प्रतीत होता है।
  6. पृथ्वी ग्रह अपने अक्ष पर 23.5° झुका हुआ है
  7. पृथ्वी ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 24 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य के परितः की गति को 365 दिन में पूरा करता है।
  8. इस ग्रह पर जल, हवा, आवश्यक गैसें प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं।
प्रश्न: पृथ्वी ग्रह को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के 71% भूभाग पर जल एवं 29% भूभाग पर स्थल है। जलीय भूभाग का सर्वाधिक उपस्थिति के कारण प्रकाश का परावर्तन भी अधिक होता है। चूंकि पानी के सतह से नीले रंग का परावर्तन सर्वाधिक होता है। अतः अंतरिक्ष से पृथ्वी ग्रह को देखने पर यह ग्रह नीले रंग का प्रतीत होता है।

(४.) मंगल ग्रह –
  1. सूर्य के सबसे निकट का चौथा ग्रह– मंगल ग्रह है।
  2. आकार के आधार पर सातवां सबसे बड़ा ग्रह मंगल ग्रह है
  3. मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहते हैं क्योंकि इस ग्रह पर आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति होती है, जिसका रंग लाल भूरा होता है।
  4. मंगल ग्रह अपने अक्ष पर की गति को 24.6 घंटा में पूरा करता है एवं परिक्रमण गति को 687 दिन में पूरा करता है।
  5. इस ग्रह के 2 उपग्रह हैं– फोबोस और डाइमोस
(५.) बृहस्पति ग्रह –
  1. सूर्य के सबसे निकट का पांचवा ग्रह– बृहस्पति ग्रह है।
  2. आकार के आधार पर सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति ग्रह है।
  3. इस ग्रह को अपने अक्ष पर पूर्णतः घूमने में सबसे कम समय लगता है जो कि लगभग 10 घंटा है।
  4. इस ग्रह को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगभग 12 वर्ष लगता है।
  5. इस ग्रह के 79 उपग्रह हैं। बृहस्पति ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह– ग्यानीमीड उपग्रह है।
  6. इस ग्रह का रंग पीला होता है।
(६.) शनि ग्रह–
  1. सूर्य के सबसे निकट का छठा ग्रह– शनि ग्रह है।
  2. आकार के आधार पर सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह शनि ग्रह है।
  3. शनि ग्रह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 10 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य का परिक्रमा 29.46 वर्ष में करता है।
  4. सर्वाधिक उपग्रह वाला ग्रह शनि है जिसे कुल 82 उपग्रह हैं।
  5. शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है।
  6. शनि ग्रह एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसके चारों ओर छल्ला अर्थात् वलय हैं।
(७.) अरूण (यूरेनस) –
  1. सूर्य के सबसे निकट का सातवां ग्रह– अरुण ग्रह है.
  2. आकार के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा ग्रह अरुण ग्रह है.
  3. यह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 16 घंटा में पूरा करता है और सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरा करता है.
  4. इस ग्रह के 27 उपग्रह हैं जिनमें सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया उपग्रह है.
  5. इसे लेटा हुआ ग्रह भी कहते हैं।
(८.) वरूण (नेप्च्यून) –
  1. सूर्य के सबसे दूर का ग्रह वरुण– ग्रह है.
  2. आकार के आधार पर चौथा सबसे बड़ा ग्रह वरुण ग्रह है.
  3. यह अपने अक्ष पर की गति को लगभग 18 घंटे में पूरा करता है एवं सूर्य की परिक्रमा 165 वर्ष में पूरा करता है.
  4. सूर्य का एक परिक्रमा करने में सबसे ज्यादा समय वरुण ग्रह को हीं लगता है।
  5. इस के उपग्रहों की संख्या 13 है।
Grahon ka parikrama chart in hindi



क्षुद्रग्रह :–
  1. क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच रहकर सूर्य का परिक्रमा करता है.
  2. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहों के टूटे हुए छोटे-छोटे टुकड़े को ही क्षुद्रग्रह कहते हैं। वास्तव में क्षुद्रग्रह ग्रह का ही टूटा हुआ भाग होता है.
  3. सबसे बड़ा शुद्र ग्रह सिरस है।
  4. क्षुद्रग्रह मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच में रहता है।

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उपग्रह :–

ग्रह के चारों ओर घूमने वाले आकाशीय पिंड को उपग्रह कहते हैं।
  • उपग्रह का अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता बल्कि यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है.
  • सभी उपग्रह ग्रह का परिक्रमा करता है.
  • सबसे ज्यादा उपग्रह वाला ग्रह शनि ग्रह है.
  • सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह ग्यानीमीड उपग्रह है।
  • पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा है।
पृथ्वी का उपग्रह : चंद्रमा –
  • चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है यह पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है।
  • चंद्रमा का प्रकाश पृथ्वी पर लगभग 1.25 सेकंड में पहुंचता है।
  • चंद्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और इतने ही समय में चंद्रमा अपने अक्ष पर भी एक चक्कर लगा लेता है, इसी कारण चंद्रमा का सदैव एक हीं सतह दिखाई देता है.
  • चंद्रमा पर दिन में बहुत गर्मी एवं रात में बहुत ठंडी होती है।
  • चंद्रमा का सतह ऊबड़–खाबर है और इस पर मिट्टी भी नहीं है।
  • चंद्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहते हैं।
  • चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है। जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है–
Chandrama dwara prithwi ki parikrama image



उल्कापिंड –

सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंडों के भाग टूट कर उसके टुकड़े गिरने लगते हैं जिसे उल्का पिंड कहा जाता है।
                यह टुकड़े गिरने के क्रम में वायु के साथ घर्षण के कारण गर्म होकर जल जाते हैं जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह टुकड़े पूर्णतः नहीं चल पाते हैं और बिना पूरी तरह जले ही पृथ्वी पर गिर जाते हैं, जिस कारण पृथ्वी की सतह पर गड्ढा बन जाता है।

आकाशगंगा–

आकाश में दूर-दूर तक रास्ते की तरह असंख्य तारों की चौड़ी गुच्छे फैली हुई होती है जो सफेद चमकदार पट्टी की तरह दिखती है जिसे आकाशगंगा कहते हैं।
  • आकाशगंगा को तारों की नदी भी कहते हैं
  • आकाशगंगा को प्रकाश की एक बहती हुई नदी भी कहते हैं।
Akashganga class6 ncert bhugol image

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सप्तर्षि तारा–

यह सात ताराओं का एक समूह है, जिस कारण इसे सप्तर्षि तारा कहते हैं। यह रात्रि आकाश में उत्तर दिशा की तरफ नजर आता है। भारतीय विद्वानों ने इन सातों ताराओं का नामकरण ऋषियों के नाम पर किया है, जो इस प्रकार है– ऋतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, वशिष्ठ, अंगिरा एवं मरिची।
                यूनानी ग्रंथों में इन सातों ताराओं का नामकरण इस प्रकार से किया गया है– अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, एपिसिलोन, एटा एवं जेटा।
Saptrishi Tara class6 ncert geography image



ध्रुवतारा–

यह एक स्थिर तारा है जो उत्तरी गोलार्द्ध में पृथ्वी के उत्तरी अक्ष पर अवस्थित है। ध्रुव तारा सदैव उत्तर दिशा में दिखता है। इसी तारा के दिशा का बोध कर प्राचीन काल के नाविक समुद्र में नाव के द्वारा यातायात करते थे। विषुवत रेखा पर किसी भी स्थान से देखने पर ध्रुवतारा क्षितिज पर दिखाई पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे ध्रुव की ओर बढ़ते हैं उसी अनुपात में क्षितिज से ध्रुवतारा की ऊंचाई भी बढ़ने लगती है। क्षितिज से ध्रुवतारे की ऊंचाई जितनी डिग्री होती है, उस स्थान का अक्षांश भी उतना डिग्री हीं होता है।


राशि–

सौरमंडल में तारों के कई विशेष समूह हैं जिसकी कुल संख्या बारह है, जिसे राशि कही जाती है।
               इन विशेष तारों के समूह में कई तारे कुछ विशेष आकृति के नजर आते हैं, इन्हीं आकृति के आधार पर बारह राशियों का नामकरण किया गया है, जो इस प्रकार से है–
मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ तथा मीन।

नक्षत्र

पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न तारों का समूह अथवा समुदाय है जिसकी संख्या 27 है, जिसे नक्षत्र कहते हैं।
                    प्रत्येक नक्षत्र को पृथ्वी 14 दिन में पार करती है, इसलिए नक्षत्र की अवधि भी 14 दिन को होती है। 27 नक्षत्र का नाम इस प्रकार से है–
अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हथिया, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठ, मूल, पूर्वा आषाढ़, उत्तरा आषाढ़, श्रावण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती।

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................................धन्यवाद..................................

12/25/21

विशेषण की अवस्था| मूलावस्था विशेषण| उत्तरावस्था विशेषण| उत्तमावस्था विशेषण| विशेषण बनाने के नियम NCERT

 विशेषण की अवस्था :–

विशेषण की मुख्यतः तीन अवस्था होती है, जो निम्नवत् है–
  1. मूल–अवस्था विशेषण
  2. उत्तर–अवस्था  विशेषण
  3. उत्तम–अवस्था विशेषण

1. मूलावस्था विशेषण –
विशेषण की ऐसी अवस्था जिसमें किसी एक संज्ञा/सर्वनाम की तुलना किसी अन्य संज्ञा/सर्वनाम के साथ नहीं की जाती, उसे मूलावस्था विशेषण कहते हैं।
जैसे– विभाती डरपोक है।,  लक्ष्मी चंचल है।,  वह मायूस लड़का है।,  ऋषिकेश साहसी है।
  • उपर्युक्त सारे उदाहरणार्थ वाक्य में रेखांकित शब्द मूलावस्था विशेषण हैं।
  • मूलावस्था विशेषण में विशेषण शब्द अपने मूल रूप में होते हैं।

2. उत्तरावस्था विशेषण –
विशेषण की ऐसी अवस्था जिसमें किसी एक संज्ञा/सर्वनाम की तुलना किसी अन्य संज्ञा/सर्वनाम के साथ की जाती है, उसे उत्तरावस्था विशेषण कहते हैं।
उदाहरण– राम श्याम से अधिक बुद्धिमान है।
गोवा में बिहार से कम आबादी है।
माउंट एवरेस्ट कुतुब मीनार से ऊंचा है।
अजमेर से ज्यादातर मेहनती मजदूर कटिहार में है। आदि।
  • उपर्युक्त सारे उदाहरणार्थ वाक्य में रेखांकित शब्द उत्तरावस्था विशेषण हैं।


मुलावस्था से उत्तरावस्था विशेषण बनाने के नियम–

"तर" प्रत्यय द्वारा –
मूलावस्था विशेषण के साथ "तर" प्रत्यय जोड़ देने पर बना नया शब्द उत्तरावस्था विशेषण होता है।
जैसे–  ज्यादा – ज्यादातर, अधिक – अधिकतर, उच्च – उच्चतर, लघु – लघुतर, गुरु – गुरुतर आदि।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ में बिना रेखांकित वाले शब्द मूलावस्था विशेषण है जबकि रेखांकित शब्द उत्तरावस्था विशेषण के उदाहरण हैं।
"से" पद द्वारा
मूलावस्था विशेषण के ठीक पहले "से" पद लगा देने पर बना नया शब्द उत्तरावस्था विशेषण होता है।
जैसे–  अधिक – से अधिक, कम – से कम, उच्च – से ऊंचा, डरपोक – से डरपोक, चालाक – से चालाक आदि।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ में बिना रेखांकित वाले शब्द मूलावस्था विशेषण है जबकि रेखांकित शब्द उत्तरावस्था विशेषण के उदाहरण हैं।

3. उत्तमावस्था विशेषण –
विशेषण की ऐसी अवस्था जिसमें किसी एक संज्ञा/सर्वनाम की तुलना सभी संज्ञा/सर्वनाम के साथ की जाती है, उसे उत्तमावस्था विशेषण कहते हैं।
उदाहरण– जिराफ सबसे लंबा पशु है।
भारत की सबसे लंबी नहर इंदिरा गांधी नहर है।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में रेखांकित शब्द उत्तम अवस्था विशेषण हैं।

उत्तरावस्था से उत्तमावस्था विशेषण बनाने के नियम–

(i) "सबसे" का प्रयोग द्वारा–
विशेषण शब्द से ठीक पहले "सबसे" का प्रयोग कर उत्तमावस्था विशेषण बनाया जाता है।
जैसे– सबसे ऊँचा, सबसे ज्यादा, सबसे छोटा, सबसे चौड़ा, सबसे मोटा आदि।

(ii) "तम" प्रत्यय द्वारा –
मूलावस्था विशेषण के साथ "तम" प्रत्यय जोड़ देने पर बना नया शब्द "उत्तमावस्था विशेषण" होता है।
जैसे– अधिक–अधिकतम, उच्च–उच्चतम, लघु–लघुतम, निम्न–निम्नतम, बहु–बहुतम, मृदु–मृदुतम आदि।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ में बिना रेखांकित वाले शब्द मूलावस्था विशेषण है जबकि रेखांकित शब्द उत्तमावस्था विशेषण के उदाहरण हैं।

मूलावस्था,उत्तरावस्था एवं उत्तमावस्था विशेषण के उदाहरण–
Mulavastha uttravastha uttmavastha visheshan ke udaharan image in hindi



{नमस्कार प्रिय पाठकों मुझे उम्मीद है कि ये लेख आपको अच्छे लगे होंगे यदि अच्छे लगे हों तो इसे अन्य पाठकों के साथ अवश्य साझा ( share ) करें.} धन्यवाद...

12/24/21

संरचना के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण| हिन्दी व्याकरण NCERT

 संरचना के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण :

संरचना के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण 5 प्रकार से किया गया है, जो निम्नवत् है–
(i) संयुक्त क्रिया
(ii) पूर्वकालिक क्रिया
(iii) प्रेरणार्थक क्रिया
(iv) नामधातु क्रिया
(v) कृदंत क्रिया


(i) संयुक्त क्रिया :–
जिस वाक्य के अंतर्गत एक वाक्य को बताने के लिए एक से अधिक क्रियापद संयुक्त रुप से सम्मिलित हों, उस क्रिया को संयुक्त क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण – मैंने पानी पी लिया। {पी लिया=पिया}
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "मैंने पानी पी लिया" में दो क्रियापद – "पी" (पीना) और "लिया" (लेना) संयुक्त रूप से प्रयुक्त है। उदाहरण में प्रयुक्त वाक्य को बिना अर्थ में परिवर्तन किए अन्य तरीके से भी लिखा जा सकता है, इस प्रकार से– "मैंने पानी पिया"।
"मैंने पानी पिया" इसी वाक्य में दो क्रिया पद के द्वारा परिवर्तन कर "मैंने पानी पी लिया" वाक्य बनाया गया है। इस वाक्य में "पी लिया" को संयुक्त रूप से सम्मिलित कर "पिया" शब्द प्रयुक्त किए गए हैं। अतः दो क्रिया पद के प्रयुक्त होने के कारण इसे संयुक्त क्रिया के अंतर्गत लिखे गये हैं।
संयुक्त क्रिया के अन्य उदाहरण–
उसने आम खा लिया
श्याम ने किताब पढ़ लिया
बच्चे को खेलना दौड़ना भी चाहिए।
मोहन तैरना जानता है।
किताब बोलकर पढ़ना अच्छी बात है। आदि।
  • उपर्युक्त वाक्य के अंतर्गत सारे रेखांकित शब्द संयुक्त क्रिया के उदाहरण हैं।
(ii) पूर्वकालिक क्रिया :–
दो क्रियापद वाले वाक्य में यदि एक क्रियापद पहले आरंभ होती हो और पहले हीं पूर्ण हो जाती हों तत्पश्चात् दूसरी क्रिया पद आरंभ होती हों और पूर्ण हो जाती हों या चलती रहती हों तो उस वाक्य में पहले पूर्ण हो चुकी क्रिया को पूर्णकालिक क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण– करीना बैठकर खाने लगी।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "करीना बैठकर खाने लगी" में शब्द "बैठकर" पूर्वकालिक क्रिया है। क्योंकि प्रस्तुत वाक्य में दो क्रियापद ( बैठना और खाना ) प्रयुक्त हुए हैं और प्रथम क्रियापद "बैठकर" पहले आरंभ होकर पहले हीं पूर्ण हो जाती है।
पूर्णकालिक क्रिया के अन्य उदाहरण –
मनीष पानी में कूदकर तैरने लगा।
मधुमाला खड़ी होकर भोजन पकाने लगी।
चूहा शेर के शरीर पर चढ़कर फूदकने लगा।
अच्छी सेहत के लिये खाकर दौड़ना नहीं चाहिए।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में सारे रेखांकित शब्द पूर्वकालिक क्रिया के अंतर्गत आते हैं।
(iii) प्रेरणार्थक क्रिया :–
जिस वाक्य के अंतर्गत वाक्य का कर्त्ता स्वयं कोई कार्य न करके किसी अन्य से करवाते हों, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण– शिक्षक विद्यार्थी से पाठ का अभ्यास करवाते हैं।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "शिक्षक विद्यार्थी से पाठ का अभ्यास करवाते हैं" में वाक्य का कर्त्ता "शिक्षक" किसी अन्य व्यक्ति "विद्यार्थी" से "पाठ का अभ्यास" करवाने का कार्य कर रहे हैं। अतः इस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया "अभ्यास करवाना" प्रेरणार्थक क्रिया है।
प्रेरणार्थक क्रिया के अन्य उदाहरण–
राजा जनक पहलवानों से धनुष उठवाते हैं।
सैनिक नवयुवकों को दौड़वाते हैं।
गुरु शिष्य से गुरुकुल साफ करवाते हैं। आदि।
  • उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण हैं।
(iv) नामधातु क्रिया :–
यदि संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण के साथ कोई प्रत्यय जोड़ने पर बनने वाला नया शब्द क्रिया का रूप धारण कर ले तो वह नवनिर्मित क्रिया, नामधातु क्रिया कहलाती है।
उदाहरण–
बाँध – बाँधना , बाँधवाना
रंग – रंगना , रंगाना
चिकना – चिकनाना
बात – बतियाना
लज्जा – लजियाना , लजाना
शर्म – शर्माना
ठंडा – ठंडाना
चक्कर – चकराना
हाथ – हथियाना
लाठी – लठियाना
फटकार – फटकारना
लात – लतियाना
थरथर – थरथराना
गरम – गरमाना
अपना – अपनाना
मोटा – मोटाना आदि।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ शब्द "लाठी" संज्ञा है। इसमें "याना" प्रत्यय जोड़ने पर एक नया शब्द "लठियाना" बन जाता है, जो कि नामधातु क्रिया है।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ में सारे रेखांकित शब्द नामधातु क्रिया है।
(v) कृदंत क्रिया :–
धातु में "ना" प्रत्यय के अतिरिक्त किसी अन्य प्रत्यय को जोड़ने पर बनने वाला नया शब्द यदि क्रिया हो तो वह क्रिया कृदंत क्रिया कहलाती है।
उदाहरण – खा+या = खाया
पी+कर = पीकर
दौड़+ता = दौड़ता
तैर+एगा = तैरेगा
सो+कर = सोकर
सो+ई = सोयी आदि।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ में रेखांकित शब्द कृदंत क्रिया के अंतर्गत आते हैं।



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12/22/21

विकारी शब्द का रूपांतरण| काल,वचन,लिंग और कारक के आधार पर NCERT

 विकारी शब्द का रूपांतरण–

विकारी शब्द को चार तरह से परिवर्तित किया जा सकता है, जो निम्नवत है–
(१.) काल के आधार पर परिवर्तन
(२.) वचन के आधार पर परिवर्तन
(३.) लिंग के आधार पर परिवर्तन
(४.) कारक के आधार पर परिवर्तन

(१.) काल के आधार पर परिवर्तन–
काल के आधार पर विकारी शब्द को वर्तमान काल, भूतकाल एवं भविष्यत् काल में रूपांतरित किया गया है। जैसा कि निम्न तालिका में दर्शाया गया है–

Vartmankal bhutkal bhabishyat kal ke vaky hindi vyakaran image


(२.) वचन के आधार पर परिवर्तन–
वचन के आधार पर विकारी शब्द को एकवचन और बहुवचन में रूपांतरित किया गया है, जैसा कि निम्न तालिका में दर्शाया गया है–
Ekvachan aur bahuvachan shabd hindi vyakaran image


(३.) लिंग के आधार पर परिवर्तन–
लिंग के आधार पर विकारी शब्द को पुल्लिंग और स्त्रीलिंग में रूपांतरित किया गया है, जैसा कि निम्न तालिका में दर्शाया गया है–
Striling aur pulling shabd hindi vyakaran image


(४.) कारक के आधार पर परिवर्तन–
कारक के आधार पर विकारी शब्द को विभक्ति चिह्न के द्वारा रूपांतरित किया जाता है। नीचे दो अलग–अलग वाक्य प्रस्तुत किए गए हैं, जिसमें साफ–साफ स्पष्ट है कि विभक्ति चिह्न के प्रयोग द्वारा विकारी शब्द को रूपांतरित किया गया है। कृपया निम्न वाक्य को ध्यानपूर्वक देखें–

राम ने श्याम को पत्र लिखा
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में "राम" कर्ता है, "श्याम" कर्म है और "पत्र लिखा" क्रिया है। जबकि नीचे के वाक्य में ऐसा नहीं है।

श्याम ने राम को पत्र का जवाब दिया
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में "श्याम" कर्ता है, "राम" कर्म है और "जवाब दिया" क्रिया है।

अतः उपर्युक्त दोनों वाक्य के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि कारक के आधार पर भी विकारी शब्द में रूपांतरण होता है।

 कारक के प्रकार एवं उनकी विभक्ति चिह्न–

Karak avm uske bhed image hindi grammar


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प्रयोग के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण| सामान्य क्रिया| सहायक क्रिया| सजातीय क्रिया हिंदी व्याकरण NCERT

 प्रयोग के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण :

प्रयोग के आधार पर क्रिया का वर्गीकरण तीन तरह से किया गया है, जो निम्नवत् है–
(i) सामान्य क्रिया
(ii) सहायक क्रिया
(iii) सजातीय क्रिया

(i) सामान्य क्रिया –
जिस वाक्य के अंतर्गत एक सामान्य कार्य बतलाने के लिए एक हीं क्रिया पद प्रयुक्त होते हों तो वाक्य में प्रयुक्त उस क्रिया पद को सामान्य क्रिया कहा जाता है।
उदाहरण– श्याम दौड़ता है।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "श्याम दौड़ता है" में एक सामान्य कार्य "दौड़ने" का बोध हो रहा है। साथ–हीं इस वाक्य में एक हीं क्रिया पद "दौड़ता" अर्थात् "दौड़ना" है। अतः प्रस्तुत वाक्य में शब्द "दौड़ता" सामान्य क्रिया के अंतर्गत आयेंगे।
सामान्य क्रिया के अन्य उदाहरण–
विकास खाता है।
दौलत पढ़ता है।
वेलोग नाचते हैं।
हम खाते हैं।
आप तैरते हो।
वे सब दौड़ते हैं।
  • उपर्युक्त सारे उदाहरणार्थ वाक्य में रेखांकित शब्द सामान्य क्रिया के उदाहरण हैं।

(ii) सहायक क्रिया–
जिस वाक्य के अंतर्गत मुख्य क्रिया की सहायता करने के लिए अन्य क्रिया प्रयुक्त की जाती है, उसी अन्य क्रिया को सहायक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण– रहा है, रही है, रहे हैं, होगा, होगी, होंगे,  था, थी, थे इत्यादि।
वेलोग जा रहे हैं।
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "वेलोग जा रहे हैं" में शब्द "जा" अर्थात् "जाना" मुख्य क्रिया है। इस मुख्य क्रिया की सहायता के लिए "रहे हैं" शब्द को प्रयुक्त किया गया है। अतः इस वाक्य में शब्द "रहे हैं" सहायक क्रिया है।


(iii) सजातीय क्रिया –
जिस वाक्य में समान जाति की क्रिया होती है, वाक्य में प्रयुक्त उस समान जाति की क्रिया को सजातीय क्रिया कहते हैं।
उदाहरण– भारत ने लड़ाई लड़ी
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य "भारत ने लड़ाई लड़ी" में शब्द "लड़ाई लड़ी" समान जाति के क्रिया हैं। अतः वाक्य में प्रयुक्त शब्द "लड़ाई लड़ी" सजातीय क्रिया के उदाहरण हैं।
सजातीय क्रिया के अन्य उदाहरण –
बछेंद्री पाल ने चढ़ाई चढ़ी
मेरे बाबू ने खाना खाया
उन्होंने गाना गाया
दुर्योधन चाल चल रहा है।
खिलाड़ी खेल खेल रहा है। आदि.
  • उपर्युक्त उदाहरणार्थ वाक्य में रेखांकित शब्द सजातीय क्रिया के उदाहरण हैं।

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