बोली और भाषा में क्या अंतर है ?
बोली या भाषा ये दोनो हीं मनुष्यों के विचार अभिव्यक्त अर्थात् प्रकट करने का एक साधन/माध्यम है। बोली और भाषा में क्षेत्र विशेष का अंतर होता है। बोली एक सीमित क्षेत्र में बोली जाती है अर्थात् बोली का क्षेत्र सीमित होता हैं।
बोली से हीं भाषा का निर्माण हुआ। भाषा के मूल स्वरूप को बोली कहते हैं। जैसे–जैसे बोली के क्षेत्र विस्तार होता चला जाता है, तो वह बोली भाषा बन जाती है। यथार्थ में भाषा बोली की अपेक्षाकृत व्यापक क्षेत्र में बोली जाती है।
बोली से हीं भाषा का निर्माण हुआ। भाषा के मूल स्वरूप को बोली कहते हैं। जैसे–जैसे बोली के क्षेत्र विस्तार होता चला जाता है, तो वह बोली भाषा बन जाती है। यथार्थ में भाषा बोली की अपेक्षाकृत व्यापक क्षेत्र में बोली जाती है।
मातृभाषा :–
मातृभाषा अर्थात् "माँ की भाषा"।
वह भाषा जो माता के मुख से सीखी जाती है अर्थात् जिस भाषा का ज्ञान माँ के मुख से होती है, उसे मातृभाषा कहते हैं।
- मनुष्यों में मातृभाषा का विकास परिवार और समाज से होता है।
- मातृभाषा को हीं विचार अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है।
- मातृभाषा हीं सबसे आदरणीय / सम्मानीय भाषा है।
राजभाषा :–
जिस भाषा में किसी राज्य अथवा देश का शासन संचालित होता है, उस भाषा को राजभाषा कहते हैं।
- भारतवर्ष में हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। संविधान सभा द्वारा हिन्दी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर 1949 को दिया गया।
राष्ट्रभाषा :–
किसी राष्ट्र की संपूर्ण जनता या अधिकांश जनता द्वारा बोली जाने वाली भाषा को राष्ट्रभाषा कहते हैं।
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